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बॉब सिम्पसन का निधन: ऑस्ट्रेलिया को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले कप्तान और कोच

ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटर और पूर्व कप्तान बॉब सिम्पसन का 89 साल की उम्र में सिडनी में निधन हो गया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 16 अगस्त 2025 को उनके निधन की पुष्टि की। सिम्पसन सिर्फ एक बल्लेबाज ही नहीं थे, बल्कि शानदार स्लिप फील्डर और दूरदर्शी कोच भी रहे। उनकी कप्तानी और कोचिंग में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट ने कई ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

बॉब सिम्पसन ने 1957 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया और करीब दो दशकों तक ऑस्ट्रेलिया के लिए खेले। उन्होंने अपने करियर में 62 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 4,869 रन बनाए और 10 शतक लगाए। उनका सबसे बड़ा स्कोर 1964 में इंग्लैंड के खिलाफ 311 रन था, जो आज भी याद किया जाता है।

सिर्फ बल्लेबाज ही नहीं, सिम्पसन एक लेग स्पिनर भी थे और टेस्ट क्रिकेट में 71 विकेट हासिल किए। उनकी स्लिप फील्डिंग तो और भी खास थी। उन्होंने 110 कैच पकड़े, जो उस दौर में किसी गैर-विकेटकीपर का बड़ा रिकॉर्ड था।

सिम्पसन ने 39 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की। इनमें से 12 मैच जीते, 12 हारे और 15 ड्रॉ रहे। 1977 में जब वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट की वजह से कई बड़े खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया से अलग हो गए थे, तब सिम्पसन ने 41 साल की उम्र में वापसी कर टीम की कमान संभाली। उस समय टीम कमजोर स्थिति में थी, लेकिन उन्होंने भारत और वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ मुकाबले खेले। भारत के खिलाफ उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया ने 5 मैचों की सीरीज 3-2 से जीती।

1986 में बॉब सिम्पसन को ऑस्ट्रेलिया का पहला फुल-टाइम कोच बनाया गया। अगले 10 साल तक (1986-1996) वे इस पद पर रहे।

उनकी कोचिंग में ऑस्ट्रेलिया ने

सिम्पसन की कोचिंग ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की नींव इतनी मजबूत की कि आगे चलकर टीम ने विश्व क्रिकेट पर दबदबा बनाया।

बॉब सिम्पसन को खेल जगत में कई बड़े सम्मान मिले।

इसके अलावा उन्हें ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया से भी नवाजा गया था।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा – “बॉब सिम्पसन की सेवाएं पीढ़ियों तक याद की जाएंगी।”

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के चेयरमैन माइक बेयर्ड ने कहा – “सिम्पसन ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की मजबूत नींव रखी और आने वाले चैंपियंस के लिए रास्ता बनाया।”

बॉब सिम्पसन सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं थे, बल्कि एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने मैदान पर रन बनाकर, कप्तान बनकर टीम को संभालकर और कोच बनकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाकर ऑस्ट्रेलिया को मजबूत किया। उनकी गिनती हमेशा क्रिकेट के सबसे बड़े दिग्गजों में होगी।

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