
जवाजा पंचायत समिति को पुनर्गठित कर नरबदखेडा पंचायत समिति बनाई गई है और जैतारण पंचायत समिति को पुनर्गठित कर रास पंचायत समिति बनाई गई है। अजमेर, पाली, भीलवाड़ा और राजसमंद जिलों से कुछ पंचायत समितियां और ग्राम पंचायतें अलग कर ब्यावर जिले में शामिल करने का प्रस्ताव है।
आपत्ति दर्ज कराने का मौका
जिला परिषद और पंचायत समितियों के गठन पर अगर किसी को आपत्ति है तो वह 6 मई तक उपखंड अधिकारी, तहसीलदार या कलेक्टर कार्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। आपत्तियां सुनने के बाद वार्डों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
वार्डों का बंटवारा
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नवसृजित रास पंचायत समिति में 3 वार्ड बनाए गए हैं।
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जैतारण पंचायत समिति में 4 वार्ड होंगे।
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रायपुर पंचायत समिति में 5 वार्ड प्रस्तावित हैं।
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जवाजा (पुनर्गठित) पंचायत समिति में 4 वार्ड होंगे।
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नरबदखेडा (नवसृजित) पंचायत समिति में 4 वार्ड बनाए गए हैं।
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बदनोर (पुनर्गठित) पंचायत समिति में 2 वार्ड हैं।
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मसूदा पंचायत समिति में 5 वार्ड बनाए गए हैं।
जिला परिषद का पहला वार्ड रास पंचायत समिति से शुरू होगा और अंतिम यानी 27वां वार्ड मसूदा पंचायत समिति के क्षेत्रों से जुड़ा रहेगा।
कमेटी का गठन
जिला परिषद और पंचायत समितियों के पुनर्गठन व सीमांकन पर आने वाली आपत्तियों के निपटारे के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी के नोडल अधिकारी अतिरिक्त कलेक्टर मोहनलाल खटनवालिया हैं। साथ ही इसमें अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाललाल मीणा, रामेश्वर सिंह लखावत और तहसीलदार हनुतसिंह भी शामिल हैं।
प्रधान बनने की तैयारियां शुरू
जिला परिषद के गठन के साथ ही अब जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति प्रधान बनने की राजनीति भी तेज हो गई है। अब तक ब्यावर जिले की राजनीति केवल जवाजा पंचायत समिति के प्रधान के इर्द-गिर्द घूमती थी, लेकिन अब नरबदखेडा और रास पंचायत समितियों के प्रधान भी राजनीति में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे ग्रामीण राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
