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ब्रिटेन बोले: चीन की जासूसी बढ़ी, खुफिया तंत्र को ₹6,800 करोड़ की मदद

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर

लंदन:
ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि हाल के वर्षों में चीन की जासूसी गतिविधियों और लोकतंत्र तथा अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के प्रयासों में बढ़ोतरी हुई है। इसके जवाब में ब्रिटेन की लेबर पार्टी सरकार अपने खुफिया एजेंसियों को 600 मिलियन पाउंड (करीब ₹6,800 करोड़) का निवेश देने जा रही है।

विदेश मंत्री डेविड लैमी ने संसद में मंगलवार को इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सत्ता में आने के बाद चीन के साथ रिश्तों की एक व्यापक समीक्षा (audit) का आदेश दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के साथ व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं, लेकिन इसके साथ ही बीजिंग से उत्पन्न खतरों के प्रति सजग रहना जरूरी है।

“हम मानते हैं कि चीन एक जटिल और लगातार सक्रिय खतरा है,” लैमी ने कहा, “मगर उससे दूरी बनाना कोई विकल्प नहीं है। हमें जहां सहयोग हो सकता है, करेंगे — लेकिन सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।”


चीन से रिश्ते: सहयोग भी, सावधानी भी

प्रधानमंत्री स्टारमर का लक्ष्य है ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को गति देना, और इसके लिए चीनी निवेश अहम भूमिका निभा सकता है। लेकिन हांगकांग में मानवाधिकार उल्लंघन, उइगर मुसलमानों की स्थिति और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेद ब्रिटेन-चीन संबंधों में बाधा बने हुए हैं।

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ और अन्य 32 संगठनों ने प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र लिखकर आग्रह किया कि वे जिमी लाई के बेटे सेबास्टियन लाई से मिलें, जिनके पिता हांगकांग में बंद हैं।

“एक ब्रिटिश नागरिक होने के नाते सेबास्टियन को यह जानने का हक है कि ब्रिटेन सरकार उनके पिता की रिहाई के लिए क्या कर रही है,” पत्र में कहा गया।


चीन की बढ़ती गतिविधियां और ब्रिटिश जवाब

ब्रिटेन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीते कुछ वर्षों में चीन की जासूसी, लोकतंत्र में हस्तक्षेप और आर्थिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं

सरकार का कहना है कि सुरक्षा नीति “खतरे के स्तर के अनुसार” तैयार की जाएगी, जिसमें जवाबी कदम और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी।

साथ ही, लंदन में चीन द्वारा प्रस्तावित नए और सबसे बड़े दूतावास परिसर को लेकर भी फैसला होना बाकी है। कई स्थानीय निवासी, मानवाधिकार कार्यकर्ता और विशेषज्ञ इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यह परिसर सरवेलेंस और असहमति दबाने का उपकरण बन सकता है।

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