
पूर्व कैबिनेट मंत्री और भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से जुड़े नेता विश्वेन्द्र सिंह ने एक सार्वजनिक मंच से फिर स्पष्ट किया कि भरतपुर राजपरिवार का निकास करौली से नहीं है, जैसा कि कुछ लोग दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भरतपुर की धरती अजेय योद्धाओं की भूमि है, और युवाओं को महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह जैसे पूर्वजों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
🔹 पूर्वजों को लेकर चल रही बहस पर दिया जवाब
भरतपुर रोड स्थित एक विवाह स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी गलत है कि भरतपुर राजपरिवार का निकास करौली से हुआ है।
उन्होंने जवाहर बुर्ज का ज़िक्र करते हुए कहा, “जो सच जानना चाहता है, वो जवाहर बुर्ज जाकर देख सकता है। वहां भगवान श्रीकृष्ण से लेकर महाराजा बृजेन्द्र सिंह तक सभी का उल्लेख है।”
🔹 करौली से निकास को लेकर है विवाद
हाल के दिनों में पूर्व राजपरिवार के सदस्य अनिरुद्ध सिंह ने दावा किया कि भरतपुर का राजपरिवार करौली से निकला है। उनके इस बयान पर जाट समाज ने नाराज़गी जताई थी और विरोध प्रस्ताव भी पारित किया गया था।
🔹 पहले भी दे चुके हैं जवाब
विश्वेन्द्र सिंह इस मुद्दे पर पहले भी दो बार बोल चुके हैं।
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4 जनवरी 2023 को पैंघोर मंदिर में हुई पंचायत में उन्होंने कहा था, “हमारे पूर्वज जाट थे, हैं और रहेंगे।”
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5 मार्च 2023 को जयपुर में हुए जाट महाकुंभ में भी उन्होंने यही बात दोहराई थी।
🔹 युवाओं को दी नसीहत
सभा में युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने हँसते हुए कहा, “आज के युवा जो कर रहे हैं, वो बड़े-बुजुर्गों की समझ से बाहर है। लेकिन मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ हूं।”
निष्कर्ष:
विश्वेन्द्र सिंह ने साफ कर दिया है कि भरतपुर राजपरिवार की पहचान जाटों से है और निकास करौली से जोड़ना इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है। उन्होंने सबूत के तौर पर जवाहर बुर्ज का हवाला दिया, जहां भरतपुर की वंशावली श्रीकृष्ण से जोड़ी गई है।
