
बच्चे को कई अस्पतालों में भटकना पड़ा
बच्चे के पिता क्षेत्रपाल सिंह ने बताया कि प्रिंस घर के बाहर खेल रहा था, तभी आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। बच्चे के हाथ को बुरी तरह नोंच दिया गया और हड्डी टूट गई। परिजन उसे लेकर पहले जिंदल हॉस्पिटल, फिर विनोद गुप्ता हॉस्पिटल, और बाद में देशवाल हॉस्पिटल पहुंचे, लेकिन कहीं भी हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं मिला। बच्चे को रेबीज के इंजेक्शन दिए गए हैं।
दो घंटे में 6 लोगों पर हमला
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उसी कुत्ते ने लगभग दो घंटे के अंदर चार युवकों और दो बच्चों पर हमला किया। कॉलोनी के लोगों ने बताया कि यह कुत्ता पागल हो चुका है और पहले भी लोगों पर हमला कर चुका है।
डंडा लेकर निकलते हैं लोग
शहर की पॉश कॉलोनियों में लोग डंडा लेकर घर से निकलते हैं, ताकि आवारा कुत्तों और बंदरों से बचा जा सके। नगर निगम की लापरवाही के चलते पिछले एक साल में 7 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों और बंदरों के काटने से घायल हुए हैं। हर दिन औसतन 25-30 लोग एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचते हैं।
अस्पताल में इलाज की स्थिति
डॉक्टरों के मुताबिक, कमर से ऊपर काटने पर सीरम लगाया जाता है, फिर तीन चरणों में इंजेक्शन दिए जाते हैं। अधिक काटने पर गंभीर इलाज की जरूरत होती है।
नगर निगम पर केस किया जा सकता है
अधिवक्ता दीपक मुदगल के अनुसार, यदि किसी को आवारा कुत्ता काटता है, तो वह नगर निगम के खिलाफ कोर्ट में मुआवजे का दावा कर सकता है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 289 के तहत आता है, जिसमें 6 माह की सजा का प्रावधान है।
पहले भी हो चुके हैं हमले
मुखर्जी नगर सेक्टर 3 में पहले भी यह कुत्ता बच्चों पर हमला कर चुका है। कुछ महीने पहले लवण्या (7 वर्ष) और ईशा (3 वर्ष) इस श्वान के शिकार बनी थीं।
निवासियों की मांग है कि नगर निगम जल्द से जल्द इस खतरनाक श्वान को पकड़कर इलाके को सुरक्षित बनाए।
