2025 की गर्मियों में भारतीय फुटबॉल को एक और मील का पत्थर पारना है: राष्ट्रीय पुरुष टीम अब 132–133वें स्थान पर है, हेड कोच मैनोलो मारकेज़ का इस्तीफा हो चुका है, और इंडियन सुपर लीग (ISL) भी रुकी हुई है – ये हालात Vision 2047 के सपने के लिए बड़ी चुनौती हैं।
- मारकेज़ का अलग होना: पिछले एक साल में सिर्फ एक जीत (मालदीव के खिलाफ) और आठ मैचों में बुरा प्रदर्शन, जिससे कोच मैनोलो मारकेज़ ने AIFF के साथ सहमति से कदम पीछे खींचा
- फीफा रैंकिंग में गिरावट: जून में थाईलैंड और हांगकांग से हार के बाद रैंकिंग गिरकर 133वीं पर पहुँच गई, जो नौ वर्षों में सबसे निचला स्तर है
- ISL पर ठहराव: शासनिक विवादों के कारण भारतीय सुपर लीग शीतलन पर है, जिससे सिस्टम और खिलाड़ियों को भारी झटका लगा है आवेदन प्रक्रिया शुरू: AIFF ने 13 जुलाई 2025 तक आवेदन मांगे, जिसमें AFC/UEFA प्रो‑लाइसेंस, 10–15 वर्षों का अनुभव, और “संस्कृति-संवेदनशीलता” जैसे मापदंड जोड़े गए
- न चयनित नाम लेकिन जोरदार बोली: अनुभवी कोच खालिद जामिल और दो बार ISL विजेता एंटोनियो लोपेज़ हाबास ने अपनी दिलचस्पी जताई
- नियुक्ति लक्ष्य: AIFF की योजना है कि जुलाई अंत तक नया कोच करार दिया जाए ताकि सितंबर FIFA विंडो के लिए तैयारी शुरू हो सके
- 2047 के लक्ष्य: अगर नेशनल टीम को मजबूत बनाना है तो फिलहाल का कोच चारबोर्ड पर भारी दबाव में है।
- एशियाई कप क्वालिफिकेशन (2027): केवल चार मैच बचे हैं, जिन्हें जीतना अब बहुत जरूरी है
- ISL सिस्टम पर प्रभाव: बिना टूर्नामेंट के, खिलाड़ियों की तैयारी और राष्ट्रीय टीम की रणनीति पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
भारतीय फुटबॉल एक निर्णायक मोड़ पर है। नए कोच की भूमिका केवल मैच‑परिणाम सुधारने तक सीमित नहीं, बल्कि यह Vision 2047 के संरचनात्मक बदलावों की नींव भी रखेगा। अनुभवी या घरेलू, जीतने का मानसिक और लोकतांत्रिक चयन — इन दोनों का संतुलन ही भारतीय फुटबॉल का अगला अध्याय कैसा लिखा जाएगा, यह तय करेगा।
- नियुक्ति पर ध्यान: जुलाई अंत तक कोच का ऐलान।
- राष्ट्रीय टीम का पुनर्गठन: रिकवरी‑सेंट्रिक टीम चयन और रणनीति।
- ISL की वापसी में सहयोग: AIFF‑FSDL समझौता होने तक इंतज़ार।

