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‘भारतीय फुटबॉल को बचाओ’: सुनील छेत्री समेत खिलाड़ियों ने फीफा से मदद की गुहार

भारत की सबसे बड़ी फुटबॉल लीग इंडियन सुपर लीग (ISL) इस समय गंभीर संकट में है। जुलाई 2025 से लीग को अनिश्चित समय के लिए टाल दिया गया है, जिससे सैकड़ों खिलाड़ियों और स्टाफ का भविष्य खतरे में पड़ गया है। इसी को लेकर भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री समेत कई खिलाड़ियों ने फीफा से मदद की अपील की है।

स्पॉन्सर नहीं मिलने से संकट

आईएसएल के नए सीजन के लिए कोई भी स्पॉन्सर नहीं मिला। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने टेंडर जारी किए, लेकिन किसी ने बोली नहीं लगाई। बिना कमर्शियल पार्टनर के लीग का आयोजन और टीवी प्रसारण संभव नहीं है। इसी कारण पूरा सीजन ही खतरे में पड़ गया है।

खिलाड़ियों की भावुक अपील

सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू, संदेश झिंगन समेत भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर एक संयुक्त वीडियो पोस्ट किया है।
इस वीडियो में खिलाड़ियों ने कहा कि जनवरी के महीने में उन्हें मैदान पर खेलते दिखना चाहिए था, लेकिन आज वे मजबूरी में अपनी परेशानी दुनिया के सामने रख रहे हैं।

गोलकीपर गुरप्रीत संधू ने कहा,
“हमें इस वक्त आईएसएल खेलते दिखना चाहिए था, लेकिन अब हमें डर और असमंजस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि भारतीय फुटबॉल गलत दिशा में जा रहा है।”

विदेशी खिलाड़ी ह्यूगो बुमौस ने सीधे फीफा से अपील करते हुए कहा कि वह आगे आए और भारतीय फुटबॉल को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए।

राजनीतिक नहीं, मजबूरी की आवाज

खिलाड़ियों ने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक कदम नहीं है।
प्रीतम कोटल ने कहा कि खिलाड़ी खेल, आर्थिक और मानवीय संकट से गुजर रहे हैं और उन्हें तुरंत मदद चाहिए।

सुनील छेत्री की खास अपील

वीडियो के अंत में सुनील छेत्री ने कहा,
“खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ, क्लब मालिकों और फैंस को स्पष्टता और सुरक्षा चाहिए। सबसे जरूरी है एक भविष्य। हम बस फुटबॉल खेलना चाहते हैं।”

खिलाड़ियों की हालत बेहद खराब

  • कई क्लबों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है

  • बेंगलुरु एफसी ने खिलाड़ियों और स्टाफ का वेतन रोक दिया

  • ओडिशा एफसी ने खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए

  • कई क्लबों ने अपना संचालन बंद कर दिया

  • 300 से ज्यादा खिलाड़ी और सैकड़ों सपोर्ट स्टाफ अनिश्चित भविष्य में फंसे हैं

  • महीनों से वेतन नहीं मिला, ट्रेनिंग भी प्रभावित

आईएसएल के 14 में से 13 क्लबों ने एआईएफएफ को बताया है कि अगर उनसे पार्टिसिपेशन फीस नहीं ली गई, तो वे खेलने पर विचार कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, भारतीय फुटबॉल इस समय सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है और खिलाड़ी अब आखिरी उम्मीद के तौर पर फीफा से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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