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भारत की जल कूटनीति से पाकिस्तान में हाहाकार, दो बड़े बांध सूखे की कगार पर, खरीफ की बुआई संकट में

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जलनीति का एक सख्त रुख अपनाया है। चिनाब नदी से पानी के बहाव में कमी के फैसले के बाद पाकिस्तान में खासतौर से पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्रों में सिंचाई संकट गहरा गया है। तरबेला और मंगला जैसे प्रमुख जलाशयों का जलस्तर तेजी से गिरा है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है।

जल संकट की चपेट में पाकिस्तान का कृषि क्षेत्र

भारत की ओर से चिनाब में जल प्रवाह सीमित किए जाने के बाद पाकिस्तान के सिंधु बेसिन में पानी की स्थिति चिंताजनक हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तरबेला बांध पर जलस्तर 1,465 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि सामान्यतः यह इससे कहीं ऊपर होना चाहिए। मंगला बांध, जो झेलम नदी पर स्थित है, वह भी 1,163 मीटर पर बना हुआ है। पंजाब में चश्मा और मराला के पास स्थित बांधों में भी जल का स्तर काफी गिरा है।

खेतों में दरारें, किसानों में चिंता

पंजाब और सिंध प्रांतों में जल संकट के चलते खरीफ फसलों की बुआई बाधित हो रही है। सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी प्रमुख नदियों में प्रवाह बहुत कम हो गया है, जिससे खेतों में दरारें पड़ गई हैं और सिंचाई लगभग ठप हो गई है। ऊपर से मानसून के देर से पहुंचने की संभावना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

भारत की नीति: ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’

22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने 23 अप्रैल को यह स्पष्ट किया कि वह सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को पानी देना सीमित करेगा। सरकार ने अपने बयान में कहा, “जब पाकिस्तान की धरती से आतंक भारत में खून बहा रही है, तब पानी देना राष्ट्रहित के खिलाफ है।”

‘वॉटर स्ट्राइक’ बना रणनीतिक हथियार

भारत द्वारा जल प्रवाह को नियंत्रित करने की रणनीति को कुछ विशेषज्ञ ‘वॉटर स्ट्राइक’ कह रहे हैं। यह कदम पाकिस्तान पर दबाव बनाने के एक गैर-सैन्य लेकिन प्रभावी तरीके के रूप में देखा जा रहा है। इसकी वजह से पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, जहां पहले ही जलवायु परिवर्तन और प्रशासनिक समस्याओं से जूझ रहे किसान अब नई चुनौती का सामना कर रहे हैं।

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