
कपड़ा फैक्ट्री के नाम पर हो रहा था दूसरा काम
जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने बताया कि फैक्ट्री का पंजीकरण कपड़ा (वस्त्र) फैक्ट्री के रूप में था, लेकिन अंदर छोटे पटाखे बनाए जा रहे थे। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है।
मृतक बिहार के रहने वाले
मृतक सभी मजदूर बिहार के मोतिहारी के रहने वाले थे। कलेक्टर ने बताया कि यह फैक्ट्री फैक्ट्री अधिनियम के तहत नहीं आती, क्योंकि इसमें 20 से कम मजदूर काम कर रहे थे। यहां 10 से भी कम श्रमिक काम कर रहे थे।
पांच लोगों की पहचान हुई
हादसे के बाद मौके से सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए एफएसएल (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) भेजा गया है। रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।
अब तक पांच मृतकों की पहचान हो चुकी है। सभी मृतकों के परिवारों को नियम अनुसार सहायता दी जाएगी। फैक्ट्री संचालक की तलाश जारी है और प्रबंधक को भी मौके पर बुलाया गया है।
हादसे के समय बाहर से बंद थी फैक्ट्री
जानकारी के अनुसार, जिस समय आग लगी, उस समय फैक्ट्री बाहर से बंद थी। अगर दरवाजा खुला होता तो शायद मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी।
सरकार अब सभी औद्योगिक क्षेत्रों में जांच करेगी कि जिस नाम से फैक्ट्री का पंजीकरण है, वहां वही काम हो रहा है या नहीं।
आग इतनी भयानक थी कि मजदूरों के शव पूरी तरह जल गए और केवल कंकाल ही बचे थे। यह हादसा पूरे इलाके के लिए बहुत दुखद और गंभीर घटना है।
