
– छह गुना रॉयल्टी बढ़ाने की मांग को अनदेखा कर केंद्र ने बदले नियम
– इससे राजस्थान के 6 हजार ग्राइंडिंग इकाइयों और 2 लाख लोगों पर असर पड़ेगा
केंद्र सरकार के नए नियम से उद्यमियों को नुकसान
राजस्थान में मिनरल व्यवसाय से जुड़े उद्यमी पिछले छह महीनों से क्वार्ट्ज-फेल्सपार की रॉयल्टी छह गुना करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि राजस्थान का कच्चा माल गुजरात के मोरवी जा रहा है, जिसे रोकना जरूरी है। लेकिन केंद्र सरकार ने इस मांग को अनदेखा कर बैराइट्स, क्वार्ट्ज-फेल्सपार और अभ्रक को माइनर मिनरल से हटाकर मेजर मिनरल में शामिल कर दिया। इससे राजस्थान के उद्यमियों को बड़ा झटका लगेगा, जबकि गुजरात के मोरवी उद्यमियों को फायदा होगा।
हालांकि, इस बदलाव से राज्य सरकार के राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अब ये सभी खदानें केंद्र सरकार के अधीन आ जाएंगी।
अब खदानों की लीज नहीं, होगी नीलामी
माइनर मिनरल से मेजर मिनरल में बदलने के बाद अब इन खदानों पर कोयला और आयरन ओर जैसे नियम लागू होंगे।
- बैराइट्स, क्वार्ट्ज-फेल्सपार और अभ्रक की खातेदारी में अब लीज नहीं मिलेगी।
- अब इन खदानों को नीलामी के जरिए आवंटित किया जाएगा।
- पहले लीज किसी अन्य को ट्रांसफर हो सकती थी, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा।
- इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (IBM), अजमेर का दखल बढ़ जाएगा।
छोटे उद्योगों पर असर, 2 लाख लोगों की नौकरी पर खतरा
क्वार्ट्ज-फेल्सपार और अभ्रक से जुड़ा उद्योग पहले से ही संकट में था, अब यह पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है।
- 6,000 ग्राइंडिंग इकाइयों का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
- इससे जुड़े 2 लाख लोगों की नौकरियों पर संकट आ सकता है।
- गुजरात के मोरवी टाइल इंडस्ट्री को फायदा मिलेगा, क्योंकि राजस्थान का कच्चा माल वहां जाता है।
- अब इनकी रॉयल्टी केंद्र सरकार निर्धारित करेगी।
कच्चे माल की कीमत बढ़ाने की जरूरत
गंगापुर खनिज उद्योग संघ के अध्यक्ष शेषकरण शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से छोटे उद्योगों को बड़ा झटका लगा है। अब रॉयल्टी दर केंद्र सरकार तय करेगी, जिससे उद्यमियों को मुश्किलें होंगी।
मिनरल्स उद्यमी दिनेश कुमावत और अर्जुन सिंह का कहना है कि छोटे उद्योगों को बचाने के लिए सभी उद्यमियों को एकजुट होना होगा और कच्चे माल की नई कीमतें तय करनी होंगी।
यह फैसला 29 जनवरी को केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद लिया गया। इस बारे में राजस्थान के किसी भी नेता या मंत्री को पहले से कोई जानकारी नहीं थी, जबकि कई राजनीतिक नेताओं का इन खदानों में हस्तक्षेप रहा है।
