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भूजल गिरने से बदली खेती की दिशा: फार्म पौंड बना किसानों का सहारा

जिले में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसी कारण अब किसान पारंपरिक सिंचाई के साधनों की बजाय जल संरक्षण के तरीकों की ओर बढ़ रहे हैं। खासकर फार्म पौंड योजना को किसानों ने बड़े पैमाने पर अपनाया है।


5 साल में 6000 किसानों ने बनवाए फार्म पौंड

पिछले 5 वर्षों में जिले के करीब 6000 किसानों ने अपने खेतों में फार्म पौंड बनवाए हैं। इससे उन्हें हर मौसम में सिंचाई के लिए पानी मिलने लगा है और खेती का तरीका भी आधुनिक हो गया है। अब किसान एक साल में कई बार फसलें उगा पा रहे हैं।


अगले दो साल का लक्ष्य: 4000 नए फार्म पौंड

कृषि विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले दो वर्षों में जिले में 4000 और फार्म पौंड बनाए जाएं। इससे जल संकट से जूझ रहे किसानों को सिंचाई का स्थायी समाधान मिलेगा और उत्पादन भी बढ़ेगा।


क्यों बढ़ा फार्म पौंड का रुझान?

  • किसान अब रातभर जागकर सिंचाई नहीं कर रहे हैं।

  • बारिश का पानी फार्म पौंड में जमा हो जाता है, जो बाद में काम आता है।

  • इस पानी से फसल की बढ़वार और पैदावार अच्छी हो रही है।

  • भूजल स्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा है।

  • कई किसानों ने बिना सरकारी सहायता के भी अपने खेतों में फार्म पौंड बनवा लिए हैं।


क्या है फार्म पौंड योजना?

  • फार्म पौंड बनवाने के लिए किसान के पास कम से कम 0.3 हेक्टेयर जमीन होना जरूरी है।

  • सामान्य फार्म पौंड के लिए सरकार की ओर से ₹1,05,000 का अनुदान,
    और प्लास्टिक लाइनिंग वाले पौंड के लिए ₹1,35,000 का अनुदान मिलता है।

  • किसान ई-मित्र पर जाकर जरूरी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

  • योजना में लाभ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलता है।


रामनिवास पालीवाल, अतिरिक्त निदेशक कृषि, ने कहा कि फार्म पौंड योजना किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे न केवल सिंचाई आसान होगी, बल्कि बिजली पर भी निर्भरता कम होगी।

इस योजना ने किसानों को जल संकट से उबरने की नई राह दिखाई है।

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