
🔹 क्या है 6-R फॉर्मूला?
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Reduce (घटाना) – कम से कम कचरा बनाना
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Reuse (दोबारा उपयोग) – चीजों को फिर से इस्तेमाल करना
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Recycle (पुनर्चक्रण) – चीजों को रिसाइकल करना
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Recover (पुनः प्राप्त करना) – कचरे से ऊर्जा या अन्य उपयोगी चीजें निकालना
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Redesign (पुनः डिज़ाइन करना) – चीजों को इस तरह बनाना कि वे कचरा कम बनाएं
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Remanufacture (पुनः निर्माण) – पुराने सामान को फिर से तैयार करना
🔹 भोपाल में क्या-क्या होगा?
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सेग्रीगेशन सेंटर: हर वार्ड में कचरे को अलग-अलग करने के सेंटर बनेंगे (गीला, सूखा, जैविक, इलेक्ट्रॉनिक कचरा)।
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रिसाइकल हब: शहर में 12 जगह रिसाइकल सेंटर बनेंगे जहाँ उपयोगी चीजें फिर से तैयार होंगी।
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वेस्ट मैनेजमेंट: रोज़ निकलने वाले 850 मीट्रिक टन कचरे में से 50% कचरा मौके पर ही निपटाया जाएगा।
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सीएनजी प्लांट: कचरे से सीएनजी बनाई जाएगी और निगम के वाहनों में इसका इस्तेमाल होगा।
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पेट्रोल-डीजल बंदी: निगम के 833 वाहन सीएनजी में कन्वर्ट किए जाएंगे।
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रिमेडिएट साइट: जैविक कचरे से बनने वाले हानिकारक गैसों को रोकने 36 एकड़ जमीन पर निपटान स्थल बनेगा।
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कोकोनट प्लांट: दानापानी क्षेत्र में 20 लाख की लागत से नारियल प्रोसेसिंग यूनिट लगेगी।
🔹 कब से लागू होगा नया फॉर्मूला?
भोपाल में यह नई व्यवस्था आने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के तहत लागू होगी। इस बार सर्वे में 6-R फॉर्मूले के आधार पर शहरों को अंक मिलेंगे।
🔹 क्या कहा निगमायुक्त ने?
हरेंद्र नारायण, नगर निगम आयुक्त ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए वित्तीय तैयारी पूरी कर ली गई है और इससे भोपाल पहले से ज़्यादा स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनेगा।
🔹 बीते 6 महीने में दूसरा बदलाव
इससे पहले केंद्र सरकार ने टॉप 10 शहरों के लिए स्वच्छता सुपर लीग बनाई थी, जिसमें भोपाल और इंदौर शामिल हैं। दोनों शहर जयपुर और इंदौर में अपनी प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं।
नया 6-R फॉर्मूला आने से उम्मीद की जा रही है कि भोपाल और अन्य बड़े शहर कचरा प्रबंधन में देशभर में एक नया उदाहरण पेश करेंगे।
