
कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा किसान मेवाराम गुर्जर के घर में हुआ। रात को मेवाराम अपने खेत पर सोने चले गए थे, जबकि घर में उनकी पत्नी हंसा देवी, बेटा लोकेश, दिलखुश, भांजा नंदराम और मां थे। अचानक मकान भरभराकर गिर गया और मलबे में दबने से हंसा देवी और लोकेश की मौत हो गई। दिलखुश और नंदराम गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि मेवाराम की मां चमत्कारिक रूप से बच गई।
धमाके की आवाज से जागे लोग
तेज धमाके की आवाज सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायलों को तुरंत सांभरलेक उपजिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया। वहीं, मां-बेटे के शवों का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया।
मेवाराम के रोने से गमगीन हुआ माहौल
घटना के वक्त मेवाराम अपने छोटे बेटे कानाराम के साथ खेत पर थे। जब उन्हें हादसे की खबर मिली, तो वे भागकर घर पहुंचे। मलबे से पत्नी और बेटे के शव निकाले गए तो मेवाराम और उनकी मां फूट-फूटकर रो पड़े। गांव में शोक की लहर दौड़ गई और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
