नई दिल्ली: मणिपुर के कई जिलों में एक बार फिर हिंसा की लहर उठी है, और इसी के साथ केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को “असंवेदनशील और चिंताजनक” करार दिया है।
हिंसा से थर्राया मणिपुर, पांच जिलों में तनाव
पिछले 24 घंटों में मणिपुर के इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने तत्काल निषेधाज्ञा लागू कर दी है और इंटरनेट सेवाएं (VPN व वीसेट सहित) भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं।
प्रियंका गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा:
“मणिपुर दो साल से हिंसा, हत्या और पलायन का सामना कर रहा है। बावजूद इसके, केंद्र सरकार शांति बहाल करने में नाकाम रही है। आखिर प्रधानमंत्री अब तक मणिपुर क्यों नहीं गए? उन्होंने न शांति की अपील की, न कोई ठोस कदम उठाया।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इससे पीछे हटना उनके संवैधानिक दायित्वों से विमुख होना है।
जयराम रमेश का भी हमला
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा:
“मणिपुर की मौजूदा स्थिति भाजपा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और असफल रणनीतियों का परिणाम है। 3 मई 2023 से जारी हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान गई, हजारों विस्थापित हुए और धार्मिक स्थल तक नष्ट हो चुके हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि तीन सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट को बार-बार टाला जा रहा है, और अब इसकी अंतिम समय-सीमा 20 नवंबर 2025 तय की गई है।
राष्ट्रपति शासन के बावजूद बहाल नहीं हुई शांति
कांग्रेस की मांग पर राज्य में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया, लेकिन इससे भी स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। रमेश ने दावा किया कि राज्य में प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, और यहां तक कि राज्यपाल को भी एयरपोर्ट से आवास तक हेलीकॉप्टर से ले जाना पड़ा।
“प्रधानमंत्री की चुप्पी शर्मनाक”
जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता केवल मणिपुर नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का “पूर्ण मौन” इस संकट को और गहरा कर रहा है।

