
शोध में हुआ बड़ा खुलासा
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IIT इंदौर के प्रो. मनीष कुमार गोयल और उनकी टीम ने 1980 से 2023 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया।
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शोध के मुताबिक, मध्यप्रदेश में वायु प्रदूषण का स्तर WHO की गाइडलाइन से 9 गुना ज्यादा है।
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कुछ दिनों में यह स्तर 20 गुना तक बढ़ जाता है, जिससे लोगों की सेहत को भारी नुकसान होता है।
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यह अध्ययन जर्नल ‘टेक्नोलॉजी इन सोसाइटी’ में प्रकाशित हुआ है।
80 दिन तक हवा बेहद खराब
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शोध के अनुसार, पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 40-50 प्रति घनमीटर होता है, जो सुरक्षित सीमा में है।
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लेकिन प्रदूषण बढ़ने पर यह 200-250 प्रति घनमीटर तक पहुंच जाता है, जो बेहद खतरनाक है।
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हर साल औसतन 70-80 दिन हवा बहुत ज्यादा प्रदूषित रहती है।
कैसे कम करें प्रदूषण?
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फैक्ट्रियों और उद्योगों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।
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एलपीजी, इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जाए।
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शहरों में अधिक पेड़-पौधे लगाए जाएं।
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बड़े शहरों में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाए।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो मध्यप्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है।
