नई दिल्ली/वॉशिंगटन — ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा हाल ही में किए गए हमले को “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” नाम दिया गया है। यह हमला 2003 के इराक युद्ध के बाद से मध्य पूर्व में सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अभियान माना जा रहा है।
रविवार को किए गए इस ऑपरेशन में फोर्डो, नतांज़ और इस्फहान जैसे ईरान के कड़े सुरक्षा घेरे वाले परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया गया। इस हमले में कुल 125 से अधिक सैन्य विमान, B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स, और टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें शामिल थीं। पहली बार युद्ध में GBU-57 ‘बंकर बस्टर’ बमों का उपयोग किया गया, जो गहराई में स्थित ठिकानों को भी तबाह कर सकते हैं।
अब ऑपरेशन मिडनाइट हैमर, हाल के वर्षों में मध्य पूर्व में हुए कई चर्चित सैन्य अभियानों की सूची में जुड़ गया है:
ऑपरेशन राइजिंग लायन (इज़राइल, जून 2025)
इज़राइल ने 13 जून को यह अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को “अस्तित्व के लिए खतरा” मानते हुए उसे निष्क्रिय करना था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्टों में हालांकि हथियार निर्माण के प्रमाण नहीं थे, लेकिन इज़राइल ने मिसाइल फैक्ट्रियों, कमांड सेंटर्स और शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया।
20 जून को IAEA प्रमुख ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि उनके निगरानी तंत्र से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ईरान में परमाणु हथियार नहीं बन रहे। दो दिन बाद अमेरिका ने तीन ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला किया।
ऑपरेशन आयरन वॉल (इज़राइल, जनवरी 2025)
इस ऑपरेशन की शुरुआत वेस्ट बैंक के जेनीन क्षेत्र में की गई थी, जिसका उद्देश्य ईरान समर्थित फिलिस्तीनी गुटों को कमजोर करना था। बाद में यह तुलकरम और अन्य क्षेत्रों तक फैल गया। इज़राइल ने इसे “ईरानी प्रभाव को खत्म करने और यहूदी बस्तियों की सुरक्षा” की दिशा में एक कदम बताया।
ऑपरेशन डेज़ ऑफ़ रिपेंटेंस (इज़राइल, अक्टूबर 2024)
26 अक्टूबर को ईरान की ओर से दागे गए मिसाइलों के जवाब में, इज़राइल ने यह ऑपरेशन चलाया। इसके तहत ईरान के कई सैन्य ठिकानों और मिसाइल निर्माण इकाइयों पर निशाना साधा गया। इज़राइली वायुसेना के सभी विमान सफलतापूर्वक लौट आए।
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस (ईरान, अप्रैल-जून 2025)
1 अप्रैल को दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर इज़राइली हमले के जवाब में, ईरान ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” शुरू किया। इसमें अब तक 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा चुके हैं। 20 जून को अभियान का तीसरा चरण शुरू हुआ, जिसमें शहीद-136 ड्रोन और गाइडेड मिसाइलों से इज़राइली सैन्य आपूर्ति केंद्रों को निशाना बनाया गया।
ऑपरेशन पोसाइडन आर्चर (अमेरिका-UK गठबंधन, जनवरी 2024)
यह अभियान यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रेड सी में किए गए समुद्री हमलों के जवाब में शुरू किया गया था। अमेरिका और ब्रिटेन ने सटीक हवाई हमले और नौसैनिक मिसाइल हमले किए। इस अभियान में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नीदरलैंड्स जैसे साझेदार देश भी शामिल रहे। हालांकि हूती क्षमताओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन छिटपुट हमले अब भी जारी हैं।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व में सैन्य अभियान लगातार बदलते राजनीतिक और सामरिक समीकरणों को दर्शाते हैं। चाहे वह परमाणु कार्यक्रम को रोकने की कोशिश हो या क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई, इन अभियानों के परिणाम वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।

