
18 साल में बने महामंडलेश्वर
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले के दौरान गुरुवार को कई साधु-संतों को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई, जिनकी उम्र 30 साल से अधिक थी। लेकिन मध्यप्रदेश के सियाराम दास महाराज को महज 18 साल की उम्र में यह उपाधि दी गई। वे स्वामी रामदास टाटांबरी के उत्तराधिकारी हैं।
13 साल की उम्र में लिया संन्यास
सियाराम दास महाराज ने 13 साल की उम्र में अपने परिवार से सारे रिश्ते-नाते तोड़कर संन्यास की राह अपनाई थी। वे दिगंबर अणि अखाड़े के श्रीमहंत रामदास महाराज टाटंबरी बाबा के शिष्य बने थे और अब उनके प्रिय शिष्य और उत्तराधिकारी हैं।
मध्यप्रदेश की और चर्चाएं
महाकुंभ में सियाराम दास महाराज के अलावा भोपाल की हर्षा रिछारिया और इंदौर की मोनालिसा की भी चर्चा हो रही है। ये महिलाएं सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और उनकी खूबसूरती ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।
