
आधार वर्ष बदला गया
सांख्यिकी मंत्रालय ने सीपीआई का आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। नई सीपीआई श्रृंखला को घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (2023-24) के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि लोगों के बदलते खर्च के पैटर्न को सही तरह से दिखाया जा सके।
अब ऑनलाइन बाजार भी होंगे शामिल
नई व्यवस्था में सिर्फ दुकानों से ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी कीमतें ली जाएंगी।
25 लाख से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को एक अलग “ऑनलाइन बाजार” माना जाएगा। इसमें दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे शहर शामिल हैं।
ओटीटी और हवाई किराया भी जुड़ेंगे
अब सीपीआई में:
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ओटीटी स्ट्रीमिंग और ब्रॉडबैंड सेवाओं के दाम
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अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का किराया
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ग्रामीण इलाकों का घर किराया
भी शामिल किया जाएगा।
खान-पान का वजन घटा
नई सीपीआई में खाने-पीने की चीजों का भार कम कर दिया गया है।
पहले यह करीब 45% था, जो अब घटकर 36.75% हो गया है।
इससे साफ है कि अब शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रांसपोर्ट, इंटरनेट और अन्य सेवाओं को ज्यादा महत्व दिया जाएगा।
सैंपल और बाजार बढ़े
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वस्तुओं की संख्या: 299 से बढ़कर 358
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ग्रामीण बाजार: 1,465
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शहरी बाजार: 1,395
अब डेटा टैबलेट के जरिए डिजिटल तरीके से जुटाया जाएगा।
सोना-चांदी और बिजली का नया तरीका
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सीपीआई में वही सोने-चांदी के गहनों के दाम जुड़ेंगे, जो आम बाजार में बिकते हैं
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बिजली के दाम अलग-अलग खपत (100, 200, 400 यूनिट) के हिसाब से लिए जाएंगे
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पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और रेल किराया केंद्र स्तर से जोड़ा जाएगा
मुफ्त योजनाएं शामिल नहीं होंगी
सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाला मुफ्त राशन या आवास सीपीआई में शामिल नहीं किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप
नई सीपीआई श्रृंखला को अंतरराष्ट्रीय ढांचे (COICOP-2018) के अनुसार तैयार किया गया है, जिससे भारत का महंगाई मापने का तरीका अब वैश्विक मानकों के करीब हो जाएगा।
कुल मिलाकर क्या बदलेगा
अब महंगाई की गणना में ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल सेवाएं और आधुनिक खर्च भी दिखेंगे। इससे सीपीआई आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खर्च को पहले से ज्यादा सही तरीके से दर्शाएगा।
