
मंत्री के काफिले को रोकने से बढ़ा विवाद
बृजभूषण राजपूत ने महोबा में हर घर नल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के बाद खराब हुई सड़कों और कथित भ्रष्टाचार को लेकर जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोक दिया। विधायक का आरोप है कि गांवों की सड़कें खोदकर छोड़ दी गईं और शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि वे पिछले दो साल से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
वायरल वीडियो से गरमाई राजनीति
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें विधायक अपने पुराने विरोध के तरीकों का जिक्र करते नजर आए। इससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिला और भाजपा के अंदर भी इस घटना को लेकर असहजता दिखी। पार्टी नेतृत्व ने विधायक से जवाब भी मांगा है।
पिता से मिली आक्रामक राजनीति की विरासत
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बृजभूषण राजपूत का यह अंदाज़ उन्हें अपने पिता गंगाचरण राजपूत से मिला है। गंगाचरण राजपूत भी अपने तेज और नाटकीय विरोध के लिए जाने जाते थे। वर्ष 2004 में सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री न बनने पर उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस कार्यालय के बाहर पिस्टल तानकर आत्महत्या की धमकी तक दे दी थी। यह घटना लंबे समय तक चर्चा में रही।
पहले भी दिख चुका है यही तेवर
बृजभूषण राजपूत ने 2014 में बुंदेलखंड अधिकार सेना से जुड़े रहते हुए कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री के घर का घेराव किया था। तब भी मुद्दे थे—पेयजल संकट, बिजली और सूखा।
BJP में आने के बाद चुनावी सफर
उन्होंने 2016 में भाजपा जॉइन की और 2017 व 2022 में चरखारी सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। वे लोध समाज से आते हैं, जिसका क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है।
पार्टी और क्षेत्र की दो राय
भाजपा के कुछ नेता मानते हैं कि मंत्री से सार्वजनिक टकराव पार्टी अनुशासन के खिलाफ है। वहीं समर्थकों का कहना है कि बुंदेलखंड लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है और विधायक का गुस्सा जनता की आवाज है। आलोचक इसे बेवजह का टकराव मानते हैं।
कुल मिलाकर, बृजभूषण राजपूत की छवि एक ऐसे नेता की बन गई है जो जमीनी मुद्दों पर खुलकर लड़ता है, लेकिन उनका आक्रामक तरीका पार्टी के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
