
यह समझौता बुधवार को राज्य परिवहन आयुक्त नवीन कुमार और मारुति सुजुकी के सीएसआर उपाध्यक्ष तरुण अग्रवाल के बीच हुआ। इस मौके पर परिवहन मंत्री शीला कुमारी और विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल भी मौजूद थे।
स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का उद्देश्य
परिवहन मंत्री ने कहा कि मारुति सुजुकी की पहल “स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT)” से यह सुनिश्चित होगा कि केवल कुशल ड्राइवरों को ही लाइसेंस मिले, जिससे सड़कें सुरक्षित होंगी। उन्होंने औरंगाबाद और पटना में पहले ही सफलतापूर्वक दो टेस्ट ट्रैक को स्वचालित किया है और अब बिहार में पांच और ADTT विकसित किए जाएंगे।
मारुति सुजुकी की भूमिका
मारुति सुजुकी के अधिकारी राहुल भारती ने बताया कि 2018 से बिहार सरकार के साथ उनका जुड़ाव है, जब उन्होंने राज्य में ड्राइवर प्रशिक्षण के लिए पहला इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (IDTR) स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और जिम्मेदार ड्राइविंग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
देश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति
भारती ने बताया कि 2014 से 2023 के बीच भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 15.3 लाख लोगों की मौत हुई है। उनका कहना है कि स्वचालित टेस्ट ट्रैक से केवल कुशल ड्राइवरों को लाइसेंस मिलेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी।
आगे के कदम
मारुति सुजुकी ने कहा कि बिहार के पांच शहरों – पूर्णिया, गया, सारण, भागलपुर और दरभंगा में नए स्वचालित टेस्ट ट्रैक स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद देश भर में कुल 44 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्वचालित हो जाएंगे।
