
महोबा विवाद बना ताजा उदाहरण
30 जनवरी को महोबा में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और स्थानीय विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच सड़क पर हुआ विवाद काफी चर्चा में रहा। यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई बार जनप्रतिनिधियों की नाराजगी और महत्वाकांक्षा खुलकर सामने आ चुकी है।
इसी वजह से अब मंत्रिमंडल विस्तार, पंचायत चुनाव, संगठन विस्तार और 2027 चुनाव से पहले असंतोष को शांत करने के लिए BJP और संघ के बीच समन्वय बैठक की तैयारी की जा रही है।
‘अंदर सब कुछ ठीक नहीं’ का संदेश
जलशक्ति राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने जुलाई 2022 में अधिकारियों पर उपेक्षा और भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद यह संदेश गया कि पार्टी और सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
संजीव बालियान और संगीत सोम की जुबानी जंग
2024 लोकसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच तीखी बयानबाजी हुई। इसका असर चुनावी नतीजों पर भी पड़ा।
चुनाव के बाद सहारनपुर से BJP प्रत्याशी राघव लखनपाल शर्मा ने अपनी ही पार्टी के मंत्री और विधायक पर हार का आरोप लगा दिया।
अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा
गाजियाबाद के लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कई बार अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार को घेरा।
वहीं, कानपुर के बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने जिलाधिकारी और CMO विवाद में CMO को हटाने के लिए धरना दिया, जबकि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई विधायक CMO के समर्थन में दिखे।
ब्राह्मण समाज को लेकर आरोप
बाल विकास राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने पुलिस के खिलाफ धरना दिया और अपने ही दल के सांसद देवेंद्र भोले पर ब्राह्मण समाज को लड़ाने का आरोप लगाया।
इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मिश्रिख सांसद अशोक रावत को 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा।
मारपीट और धरनों से बढ़ी असहजता
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अगस्त में राज्यमंत्री सुरेश राही ने विद्युत उपकेंद्र में धरना दिया
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वाराणसी में मंच पर मंत्रियों के बीच तनाव देखने को मिला
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31 जनवरी को अयोध्या में जिलाध्यक्ष और पार्टी नेता के बीच मारपीट की घटना भी चर्चा में रही
प्रदेश अध्यक्ष का बयान
इन सब घटनाओं के बीच BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि
“BJP एक संगठन आधारित पार्टी है। जनहित के मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन कोई बड़ा विवाद नहीं है। अनुशासन सर्वोपरि है।”
👉 कुल मिलाकर, मिशन 2027 से पहले BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी असंतोष और अनुशासन बनाए रखना बनता नजर आ रहा है।
