
मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में कई अहम बदलाव किए हैं ताकि योजना को और बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। यह फैसला हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
अब ये शर्तें मानना जरूरी होंगी:
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गरीबी रेखा के नीचे (BPL) होना अनिवार्य – कन्या और उसके अभिभावकों का BPL पोर्टल पर सत्यापन जरूरी होगा।
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सामूहिक विवाह सम्मेलन संभाग स्तर पर वार्षिक चक्र के अनुसार तय कैलेंडर के आधार पर आयोजित होंगे।
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सम्मेलन में शामिल होने वाले जोड़ों की संख्या कम से कम 11 और अधिकतम 200 हो सकती है।
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आवेदन की जांच (स्क्रूटनी) पहले की तरह ही स्थानीय निकाय स्तर पर की जाएगी।
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आधार और ई-केवाईसी जरूरी – वर-वधू दोनों का समग्र पोर्टल पर आधार ई-केवाईसी अनिवार्य है।
योजना में यह आर्थिक बदलाव भी:
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प्रत्येक कन्या को कुल 55 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाएगी:
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49 हजार रुपए वधू को सीधे उसके खाते में डीबीटी के माध्यम से दिए जाएंगे।
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6 हजार रुपए विवाह सम्मेलन आयोजन के खर्च के लिए स्थानीय निकाय को दिए जाएंगे।
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समाज की भागीदारी भी होगी:
इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं की मदद से समाज के संपन्न और सक्षम लोगों का सहयोग भी लेगी।
इन बदलावों का मकसद योजना को पारदर्शी, प्रभावी और लाभदायक बनाना है ताकि जरूरतमंद परिवारों को इसका पूरा लाभ मिल सके।
