वॉशिंगटन | 20 जून 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ व्हाइट हाउस में हुई लंच मीटिंग के बाद ईरान-इज़राइल संघर्ष में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है।
ट्रंप ने कहा कि असीम मुनीर इज़राइल के खिलाफ नहीं हैं और उन्होंने स्वीकार किया कि जनरल मुनीर को ईरान की आंतरिक और रणनीतिक स्थिति की गहरी समझ है। इस टिप्पणी को ट्रंप प्रशासन के मध्य-पूर्व नीति संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
“मुनीर ईरान को दूसरों से बेहतर समझते हैं” – ट्रंप
पत्रकारों के एक सवाल पर जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा:
“जनरल मुनीर को ईरान के हालात की बहुत अच्छी समझ है — शायद किसी और से बेहतर। वे इज़राइल के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों पक्षों को समझते हैं। ईरान को वे बेहद नज़दीक से जानते हैं और मेरी राय से वे सहमत भी थे।”
ट्रंप के मुताबिक़, यह बैठक उन प्रयासों का हिस्सा थी जिसके ज़रिए अमेरिका पाकिस्तान को युद्ध में तटस्थ रहने के लिए प्रेरित कर रहा है।
भारत-पाक संघर्ष और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर ट्रंप की सावधानी
ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के हालिया सैन्य संघर्ष पर भी बात की। उन्होंने इस बार खुलकर कोई मध्यस्थता का दावा नहीं किया, जैसा वे पहले करते रहे हैं।
“दो समझदार नेताओं ने परमाणु युद्ध को टालने का निर्णय लिया,” — ट्रंप
ट्रंप का यह रुख़ इस मायने में अलग है कि उन्होंने इस बार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ या 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई श्रेय लेने की कोशिश नहीं की।
भारत की दो टूक: मध्यस्थता नहीं, सीधी बातचीत
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस संदर्भ में स्पष्ट कर दिया है कि:
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पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि भारत ने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की।
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर पर बातचीत सीधे सैन्य चैनल के माध्यम से हुई।
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पहल इस्लामाबाद की तरफ से आई थी, और भारत ने रणनीतिक रूप से उचित निर्णय लिया।
पीएम मोदी ने G7 सम्मेलन के बाद यह भी दोहराया कि भारत-पाक मसलों में किसी तीसरे देश की भूमिका की कोई ज़रूरत नहीं है, और इस पर भारत में पूर्ण राजनीतिक सहमति है।
कूटनीतिक संदेश क्या है?
ट्रंप की यह बयानबाज़ी दर्शाती है कि अमेरिका ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव में पाकिस्तान को एक संतुलित भूमिका में देखना चाहता है, न कि किसी एक पक्ष के साथ।
वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने सैन्य और कूटनीतिक फैसले पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लेता है, और अमेरिका की भूमिका को सीमित रखता है।
निष्कर्ष: एक जटिल भू-राजनीतिक संतुलन
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ट्रंप की जनरल मुनीर की तारीफ़ और भारत के प्रति सावधानीभरा रुख़ यह दर्शाते हैं कि अमेरिका दोनों दक्षिण एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलन में रखना चाहता है।
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भारत की स्थिति स्पष्ट है: कोई तीसरा पक्ष, कोई मध्यस्थता नहीं।
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पाकिस्तान को अमेरिका की ओर से जो “तटस्थता के लिए धन्यवाद” मिला है, वह क्षेत्रीय रणनीति में अस्थायी राहत हो सकता है, लेकिन भारत के लिए राजनीतिक रूप से सख्त संदेश भी।

