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मुरादाबाद में गैस की कमी से बढ़ी देसी ईंधन की मांग, उपले और लकड़ी के दाम बढ़े

मुरादाबाद में एलपीजी और कमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी के कारण होटल, ढाबों और छोटे दुकानदारों को अब लकड़ी, कोयला और उपलों जैसे देसी ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है। गैस की सप्लाई प्रभावित होने से इन पारंपरिक ईंधनों की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे उनके दाम भी बढ़ने लगे हैं।

उपलों के दाम में तेज बढ़ोतरी

गैस संकट का सबसे ज्यादा असर उपलों के बाजार में देखा जा रहा है। जो उपला पहले लगभग 3 रुपये में मिलता था, अब 5 से 6 रुपये तक बिक रहा है। बढ़ती मांग के कारण कई जगहों पर उपले मिलना भी मुश्किल हो गया है। सड़क किनारे ठेले और छोटे ढाबे चलाने वाले लोग सबसे ज्यादा उपले खरीद रहे हैं।

लकड़ी और कोयले की कीमत भी बढ़ी

उपलों के साथ-साथ लकड़ी और कोयले के दाम भी बढ़ गए हैं। पहले जो लकड़ी करीब 10 रुपये प्रति किलो मिलती थी, अब 13 रुपये किलो तक पहुंच गई है। कई होटल और रेस्टोरेंट अब गैस की जगह कोयले की भट्टी पर खाना बना रहे हैं।

ढाबों और होटलों ने बदला तरीका

गैस की कमी के कारण कई ढाबों और छोटे होटलों को खाना पकाने का तरीका बदलना पड़ा है। हाईवे किनारे कई जगह अब चूल्हों पर लकड़ी और कोयला जलाकर खाना बनाया जा रहा है।

छोटे दुकानदार सबसे ज्यादा प्रभावित

सड़क किनारे पकौड़ी का ठेला लगाने वाले राहुल कश्यप बताते हैं कि गैस सिलिंडर मिलना लगभग बंद हो गया है। इसलिए उन्हें लकड़ी और उपले जलाकर काम चलाना पड़ रहा है। इससे उनकी लागत भी बढ़ गई है।

चूल्हा और अंगीठी बन रहे सहारा

चाय बेचने वाले समर अली का कहना है कि उनका कमर्शियल सिलिंडर खत्म हो गया था और नया सिलिंडर नहीं मिला। इसलिए उन्होंने लोहे का चूल्हा खरीदकर लकड़ी और उपले से चाय बनाना शुरू किया

गांवों से मंगाए जा रहे उपले

शहर में कमी होने के कारण कई दुकानदार अब गांवों से उपले मंगवा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि बड़े होटल तो कोयला खरीद लेते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के पास लकड़ी और उपलों का ही सहारा है।

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