
शिक्षकों की युक्तियुक्तकरण (समायोजन) प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शेख रफीक को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संभागायुक्त से अनुमति मिलने के बाद की।
क्या है मामला?
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युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और मनमानी की गई थी।
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20 से ज्यादा शिक्षकों को दूसरी जगहों पर ट्रांसफर होने की स्थिति बन गई।
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अतिशेष शिक्षकों को रात में सूचना देकर अगली सुबह काउंसलिंग के लिए बुलाया गया।
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इससे नाराज शिक्षक संगठनों ने विरोध किया और कलेक्टर से शिकायत की।
जांच में क्या निकला?
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जांच में पता चला कि गीदम ब्लॉक ने जो अतिशेष शिक्षकों की सूची बनाई थी, उसमें कई गंभीर गलतियां थीं।
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इसी कारण पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया को अगले दिन ही रद्द करना पड़ा।
क्या-क्या गड़बड़ियां हुईं?
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दिव्यांग शिक्षक राजकुमार जैन को गलती से अतिशेष घोषित कर दिया गया।
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31 आश्रम स्कूलों के खाली पदों को प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
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वरिष्ठता सूची में फेरबदल कर शिक्षकों का मनमाने तरीके से ट्रांसफर किया गया।
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आश्रम अधीक्षकों को भी अतिशेष सूची में शामिल किया गया।
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विशेष संस्थाओं में कार्यरत शिक्षकों को भी गलत तरीके से समायोजन सूची में डाला गया।
कार्रवाई क्यों हुई?
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इन सभी अनियमितताओं की पुष्टि जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा की जांच में हुई।
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इसके बाद संभागायुक्त से अनुमति लेकर बीईओ शेख रफीक पर विभागीय कार्रवाई और निलंबन का फैसला लिया गया।
👉 प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
