अंकारा/इस्तांबुल: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अब शांति वार्ता की संभावनाओं में एक नई हलचल दिख रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि उनका देश तुर्किए के इस्तांबुल शहर में रूस के साथ वार्ता के लिए एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। इस दल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव करेंगे।
शांति की पहल, लेकिन पुतिन नदारद
यह वार्ता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यह रूस-यूक्रेन की पहली प्रत्यक्ष बातचीत है। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। जेलेंस्की ने कहा कि उन्होंने पुतिन को सीधे बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उनकी ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
“ट्रंप को दिखाना चाहता हूं कि हम युद्ध खत्म करना चाहते हैं” – जेलेंस्की
जेलेंस्की ने अंकारा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रूस की ओर से भेजे गए प्रतिनिधियों में कोई ऐसा नहीं है जो वास्तव में निर्णय लेने की स्थिति में हो। उन्होंने कहा कि वह यह दुनिया और खासकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिखाना चाहते हैं कि यूक्रेन वास्तव में युद्ध खत्म करने के लिए तैयार है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया: “जब तक मैं और पुतिन आमने-सामने नहीं बैठते, तब तक समाधान संभव नहीं”
डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक वह और पुतिन साथ नहीं बैठते, तब तक वास्तविक समाधान मुश्किल है। दोहा में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “हमें इस संकट का हल निकालना होगा, क्योंकि बहुत से लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।”
किस-किस की होगी मौजूदगी?
यूक्रेन की ओर से वार्ता में हिस्सा लेने वाले प्रमुख अधिकारी होंगे –
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रक्षा मंत्री रुस्तम उमरोव
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विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आंद्रेई सिबिहा
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राष्ट्रपति कार्यालय प्रमुख आंद्रेई यरमक
वहीं, रूस की ओर से पुतिन के सहयोगी व्लादिमीर मेडिंस्की प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। साथ ही तीन अन्य वरिष्ठ अधिकारी और चार तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल होंगे।
जेलेंस्की की स्पष्ट शर्त: वार्ता सिर्फ पुतिन से
यूक्रेन के राष्ट्रपति के सलाहकार मिखाइलो पोडोल्यक ने स्पष्ट किया कि जेलेंस्की केवल पुतिन के साथ ही प्रत्यक्ष बातचीत के लिए तैयार हैं। इससे साफ है कि यूक्रेन वार्ता को सिर्फ प्रतीकात्मक रूप नहीं देना चाहता, बल्कि वह वास्तविक समाधान की दिशा में गंभीर कदम उठाना चाहता है।
निष्कर्ष: यूक्रेन और रूस के बीच लंबे समय से चल रही जंग में अब एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर यूक्रेन शांति के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर पुतिन की गैरमौजूदगी इस पहल की गंभीरता को लेकर सवाल भी खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह वार्ता युद्धविराम की ओर पहला कदम साबित होगी या एक और अधूरी कोशिश बनकर रह जाएगी।

