channel_009
यूपी के बाहुबलियों के हथियार लाइसेंस पर हाईकोर्ट सख्त
बृजभूषण शरण सिंह, राजा भइया और धनंजय सिंह समेत 19 नेताओं की मांगी रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चर्चित बाहुबली नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर गंभीर आरोपों और आपराधिक मामलों के बावजूद इन लोगों को हथियार रखने की अनुमति कैसे दी गई।
हाईकोर्ट ने बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह, जनसत्ता दल प्रमुख राजा भइया, पूर्व सांसद धनंजय सिंह समेत कुल 19 लोगों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने प्रशासन से यह जानकारी मांगी है कि किन आधारों पर इन व्यक्तियों को शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए और क्या लाइसेंस जारी करते समय सभी नियमों का पालन किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कानून-व्यवस्था और लाइसेंस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी चिंता जताई। अदालत ने साफ संकेत दिए कि अगर नियमों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में लंबे समय से बाहुबल और राजनीति का संबंध चर्चा का विषय रहा है। कई ऐसे नेता हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके पास हथियार लाइसेंस मौजूद हैं। इसी मुद्दे को लेकर दायर याचिका पर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है और इसमें व्यक्ति की पृष्ठभूमि, आपराधिक रिकॉर्ड और सुरक्षा जरूरतों का मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट की यह सुनवाई आने वाले समय में बड़े प्रशासनिक बदलाव की वजह बन सकती है।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आम नागरिकों को लाइसेंस के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोगों को आसानी से अनुमति कैसे मिल जाती है।
फिलहाल, राज्य सरकार और प्रशासन को कोर्ट के सामने विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस पूरे मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

