
किसान इन दिनों रकबा कटौती की समस्याओं को लेकर तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में किसान तहसील कार्यालय पहुंचे और यहां अधिकारियों की राह देखी। ये किसान नेवता, बफना, मूलमुला, मालगांव, उमरगांव, भीरागांव, चिपावंड, कोकोड़ी समेत दो दर्जन से अधिक गांवों से अपनी समस्याओं का समाधान करवाने पहुंचे थे।
किसानों की मांग
किसानों का कहना है कि पिछले दो-तीन दिनों से वे लगातार तहसील कार्यालय की भुईयां शाखा में आवेदन दे रहे हैं, लेकिन तहसीलदार के हड़ताल पर होने और अन्य व्यवस्थाओं की कमी के कारण उन्हें अगले दिन आने को कहा जा रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पोर्टल में रकबा से जुड़ी त्रुटियों को जल्दी सुधारा जाए, ताकि आने वाले वर्षों में उन्हें और परेशानी न हो।
किसानों की समस्याएं
किसान तांबेश्वर कोर्राम ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 142 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था, लेकिन इस बार पोर्टल में उनके खाते में केवल 52 क्विंटल धान ही दिख रहा है। वहीं राजेश मानिकपुरी ने बताया कि उनकी मां के नाम पर खेती है और पिछले साल 69 क्विंटल धान बेचा था, लेकिन इस बार उनका खाता शून्य दिखा दिया गया है।
धान की बिक्री में परेशानी
यह समस्या कई अन्य किसानों के साथ भी हो रही है, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं। किसानों का आरोप है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार उनके रकबे में कटौती की गई है, जिससे उन्हें समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में बड़ा नुकसान हो रहा है। किसानों ने कहा कि पिछली सरकार ने उनके रकबे के अनुसार धान खरीदी की थी, लेकिन इस साल पोर्टल में कई किसानों के नाम पर शून्य क्विंटल धान दिख रहा है, जबकि उन्होंने अपनी खेतों में धान उगाया है और अब बिक्री के लिए आएंगे।
