
देवगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र के विजयपुरा गांव में ऐसा फैसला हुआ, जिसने सालों पुराना पारिवारिक विवाद चुटकियों में सुलझा दिया। मामला चार सगे भाइयों के बीच पुश्तैनी खेत को लेकर झगड़े का था, जो बरसों से चल रहा था। लेकिन प्रशासन की पहल से सभी भाई गले मिलकर एक हो गए।
क्या था मामला?
विजयपुरा के रहने वाले भंवरसिंह, बाबूसिंह, नारायणसिंह और अर्जुनसिंह के बीच पुश्तैनी खेत को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कई सालों से न्याय की तलाश में वे इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन कहीं समाधान नहीं मिला। इस झगड़े की वजह से परिवार बिखर गया था और गांव में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया था।
प्रशासन ने लिया तुरंत फैसला
जब यह मामला पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा शिविर में सामने आया, तो एसडीएम अर्चना चौधरी ने तत्काल एक्शन लिया। उन्होंने मौके पर ही पत्थरगढ़ी का आदेश पारित किया और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमांकन कर के तुरंत भूमि बंटवारा किया जाए। कुछ ही देर में जमीन का स्पष्ट बंटवारा हो गया और विवाद खत्म हो गया।
भाई हुए भावुक, बोले – “नई सुबह जैसा है ये”
चारों भाइयों ने गले मिलकर प्रशासन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि “सरकार ने हमारी पीड़ा समझी, हमें न्याय दिया, ये हमारे लिए एक नई शुरुआत है।”
एसडीएम अर्चना चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ एक जमीन का विवाद नहीं था, बल्कि पारिवारिक रिश्तों को फिर से जोड़ने का मौका था।
शिविर में और भी मामलों का निपटारा
तहसीलदार धर्मेंद्र स्वामी ने बताया कि शिविर में कुल 42 नामांतरण, 4 सहमति से खाता विभाजन, 5 रास्ते के विवाद, और 21 पत्थरगढ़ी के मामलों सहित कई समस्याओं का तुरंत समाधान किया गया। साथ ही ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं के प्रमाण पत्र और अन्य सुविधाएं भी दी गईं।
इस मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
एक छोटे से फैसले ने सालों पुराना झगड़ा सुलझा दिया और एक परिवार फिर से एक हो गया। यह मिसाल है कि अगर प्रशासन तत्परता से काम करे, तो बड़े-बड़े विवाद भी पल भर में सुलझ सकते हैं
