
अनुमान है कि अगर ये करीब 10 बड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो जाते, तो लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपए तक की बचत हो सकती थी। आइए जानते हैं इन प्रमुख परियोजनाओं की स्थिति।
1. राजस्थान रिफाइनरी, पचपदरा
बालोतरा जिले के पचपदरा में बन रही रिफाइनरी की शुरुआती लागत लगभग 43 हजार करोड़ रुपए थी। इसे अक्टूबर 2022 तक पूरा होना था, लेकिन अब मार्च 2026 तक की नई समयसीमा तय की गई है। इसकी लागत बढ़कर करीब 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
2. वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
इस परियोजना की शुरुआत 51 हजार करोड़ रुपए से हुई थी और इसे मार्च 2022 तक पूरा होना था। अब इसकी समयसीमा मार्च 2026 कर दी गई है और लागत बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है।
3. रामगंजमंडी–भोपाल नई रेल लाइन
इस रेल परियोजना की लागत पहले 3032 करोड़ रुपए थी। अब यह बढ़कर 5073 करोड़ रुपए हो गई है। पहले इसे 2025 तक पूरा होना था, अब 2027 का लक्ष्य रखा गया है।
4. नीमच-बड़ी सादड़ी रेल लाइन
495 करोड़ रुपए की यह परियोजना अब 825 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। समयसीमा भी बढ़ा दी गई है। यह रेल लाइन राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ती है।
5. मुकुंदरा हिल्स टनल, कोटा
दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे के तहत इस टनल की लागत लगभग 1000 करोड़ रुपए है। काम 2019 में शुरू हुआ था और इसे 2024 तक पूरा होना था। अब 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। देरी से करीब 50 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च बढ़ा है।
6. बेणेश्वर धाम पुल, डूंगरपुर
132 करोड़ रुपए की लागत से शुरू इस पुल का काम अभी 60 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। इसकी लागत में करीब 20 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है। नई समयसीमा मार्च 2026 रखी गई है।
7. झुंझुनूं पुलिस लाइन आरओबी
2019 में 51 करोड़ रुपए से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट बजट की कमी के कारण अटका हुआ है। इसकी लागत लगभग दोगुनी होने की संभावना है। अब इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
8. हनुमानगढ़–सतीपुरा आरओबी
60 करोड़ रुपए की यह परियोजना छह साल से देरी का सामना कर रही है। इसमें 7 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत जुड़ चुकी है। समन्वय की कमी को देरी का मुख्य कारण बताया गया है।
9. धौलपुर–सरमथुरा रेल लाइन
नैरोगेज से ब्रॉडगेज में बदलने का यह काम 2019 तक पूरा होना था, लेकिन अब 2027 तक की समयसीमा तय है। लागत कई गुना बढ़ चुकी है।
10. जोधडास ओवरब्रिज, भीलवाड़ा
52 करोड़ रुपए की इस परियोजना में अब तक 30 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इसे 2026 तक पूरा करने का दावा है, लेकिन देरी के कारण लागत और बढ़ने की आशंका है।
निष्कर्ष
राजस्थान के ये बड़े प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं होने से न सिर्फ लागत बढ़ रही है, बल्कि जनता को मिलने वाले लाभ भी टलते जा रहे हैं। सवाल यह है कि इस भारी आर्थिक नुकसान और देरी की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
