
कौन-कौन हैं अपात्र?
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जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपए से ज्यादा है
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जो सरकारी नौकरी में हैं
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आयकरदाता हैं
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जिनके पास कार है
इन सभी को योजना के लिए अयोग्य (अपात्र) माना गया है।
‘गिवअप अभियान’ का मकसद
मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग स्वेच्छा से राशन सब्सिडी छोड़ें, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को इस योजना का लाभ मिल सके।
उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि पात्र लोगों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ा जाए और अपात्र लोगों को हटाया जाए।
अब तक कितने लोगों ने छोड़ी सब्सिडी?
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प्रदेश में अब तक 21 लाख परिवारों ने स्वेच्छा से खाद्य सब्सिडी छोड़ी है।
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37 लाख नए पात्र परिवारों को योजना में जोड़ा गया है।
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खैरथल-तिजारा जिले में 38,376 अपात्र लोग योजना से हटे हैं।
जिले में क्या स्थिति है?
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2022 में 22,855 आवेदन आए थे, जिनमें से:
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7619 परिवारों को योजना में जोड़ा गया
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3213 परिवार अपात्र पाए गए
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2025 में अब तक 7300 आवेदन, जिनमें से:
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3820 परिवार जोड़े गए
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141 परिवार अपात्र पाए गए
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मंत्री की सख्त चेतावनी
सुमित गोदारा ने कहा,
“जो लोग सब्सिडी के पात्र नहीं हैं, वे 30 जून से पहले स्वेच्छा से नाम वापस लें, नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उचित मूल्य दुकानों के डीलरों का मई तक का बकाया कमीशन जारी कर दिया गया है।
निष्कर्ष:
राज्य सरकार अब खाद्य सुरक्षा योजना में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त कदम उठा रही है। असली जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिले, इसके लिए अपात्र लोगों को खुद ही योजना से बाहर होना होगा, वरना कड़ी सजा तय है
