राजस्थान में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन केस में बड़ा खुलासा, दिल्ली-इंदौर और UP तक फैला सप्लाई नेटवर्क
channel_009 | हेल्थ/क्राइम डेस्क
राजस्थान में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क की सप्लाई सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं थी, बल्कि दिल्ली, इंदौर और उत्तर प्रदेश तक नकली इंजेक्शन भेजे जा रहे थे। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल अवैध रूप से डेयरी और पशुपालन से जुड़े मामलों में किया जा सकता है। कई जगह इसका दुरुपयोग दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किए जाने की आशंका रहती है, जबकि यह पशुओं और इंसानों दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कैसे फैला नेटवर्क?
जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली इंजेक्शन कहां तैयार किए जा रहे थे, किन डीलरों के जरिए सप्लाई हो रही थी और किन राज्यों में इन्हें भेजा गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सप्लाई चेन में कई बिचौलियों और थोक स्तर के लोगों की भूमिका हो सकती है।
स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा
नकली या अवैध ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का दुरुपयोग पशुओं पर क्रूरता के साथ-साथ दूध की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकता है। अगर ऐसे इंजेक्शन का अनियंत्रित इस्तेमाल होता है, तो इसका असर आम लोगों की सेहत तक पहुंच सकता है।
एजेंसियों की जांच तेज
राजस्थान में मामला सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियां दिल्ली, इंदौर और UP तक फैले लिंक की पड़ताल कर रही हैं। गोदाम, मेडिकल सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के मोबाइल व बैंकिंग ट्रांजैक्शन खंगाले जा सकते हैं।
बड़ा सवाल
नकली इंजेक्शन इतने बड़े नेटवर्क के जरिए अलग-अलग राज्यों तक कैसे पहुंचते रहे? क्या स्थानीय निगरानी कमजोर थी या सप्लाई चेन में मिलीभगत थी? अब जांच के बाद ही साफ होगा कि इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन केस राजस्थान से निकलकर कई राज्यों तक फैलता दिख रहा है। यह मामला सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चेतावनी भी है।

