राजस्थान के निकाय चुनावों में 2,273 निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने BJP और कांग्रेस दोनों का राजनीतिक गणित बदल दिया है। खासतौर पर उन निकायों में जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय पार्षद मेयर, सभापति और चेयरपर्सन चुनने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पाली नगर निगम इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां 65 सीटों में कांग्रेस को 29, BJP को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत है, इसलिए कांग्रेस को भी अतिरिक्त समर्थन चाहिए। इसी तरह अन्य स्थानीय निकायों में आने वाले दिनों में समर्थन, गठबंधन और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव में निर्दलीय बने ‘तीसरी ताकत’, बोर्ड गठन में निभाएंगे बड़ी भूमिका

