
चुनाव आयोग ने दिया सख्त संदेश
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि अदालत के आदेशों के पालन में अब और देरी नहीं की जा सकती। आयोग ने सुझाव दिया है कि अगर OBC आरक्षण पर फैसला समय पर नहीं हो पाता, तो OBC सीटों को जनरल मानकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी जाए।
इसके लिए आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के मध्य प्रदेश से जुड़े एक फैसले का भी हवाला दिया है।
देरी हुई तो अफसर होंगे जिम्मेदार
निर्वाचन आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य अप्रैल तक चुनाव नहीं हुए और कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू की, तो इसके लिए पंचायती राज विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। आयोग ने सरकार से सभी सीटों के आरक्षण की स्थिति तुरंत स्पष्ट करने को कहा है।
डेटा में बड़ी गड़बड़ी सामने आई
इस पूरे मामले की मुख्य वजह गलत डेटा बताया जा रहा है। OBC आयोग के अनुसार जन आधार प्राधिकरण द्वारा दिए गए आंकड़ों में कई बड़ी गलतियां हैं।
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प्रदेश की 403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या और OBC आबादी शून्य दिखाई गई है।
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सरकारी नियमों के अनुसार पंचायत की आबादी कम से कम 1200 होनी चाहिए, लेकिन 118 पंचायतों में आबादी 1 से 500 के बीच दिखाई गई है।
इन गड़बड़ियों के कारण OBC आयोग समय पर अपनी रिपोर्ट देने की स्थिति में नहीं है।
OBC वर्ग में बढ़ी चिंता
यदि OBC सीटों को जनरल मानकर चुनाव कराए जाते हैं, तो:
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OBC उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से मुकाबला करना पड़ेगा।
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जिन क्षेत्रों में OBC आबादी ज्यादा है, वहां यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।
हाई कोर्ट की समय सीमा
राजस्थान हाई कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि मध्य अप्रैल तक चुनाव कराए जाएं। इसलिए सरकार पर समय सीमा का दबाव है।
डेटा सुधारने के निर्देश
OBC आयोग ने जन आधार प्राधिकरण को गलत आंकड़ों को तुरंत ठीक करने के लिए कहा है। साथ ही मुख्य सचिव से सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश देने को कहा गया है कि वे पंचायतवार SC, ST और OBC की सही जनसंख्या का डेटा उपलब्ध कराएं।
इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान की राजनीति और प्रशासन में हलचल बढ़ गई है और सभी की नजर अब आगे होने वाले फैसलों पर टिकी है।
