
झुंझुनूं जिले के खेतड़ी थाना इलाके में हिरासत में लिए गए अजीतगढ़ गांव के युवक पप्पू मीणा की संदिग्ध हालत में मौत हो गई। इस घटना के बाद सोमवार सुबह से ही थाने के बाहर परिजनों और लोगों ने धरना शुरू कर दिया।
भाई का आरोप – पैसे लेकर छोड़ा, फिर मौत की खबर
मृतक के भाई हीरालाल मीणा ने आरोप लगाया कि 6 अप्रैल को पुलिस पप्पू को ले गई और दो लाख रुपए की मांग की गई। 8 अप्रैल को पैसे देने के बाद कहा गया कि पप्पू और दीपक को छोड़ दिया जाएगा। लेकिन 14 अप्रैल की रात 2:13 बजे पुलिस ने फोन कर बताया कि पप्पू की मौत हो गई है और शव बीडीके अस्पताल में रखा है। जब परिजनों ने शव देखा तो उस पर चोटों के गंभीर निशान थे।
किस-किस पर दर्ज हुआ केस?
मृतक के भाई की रिपोर्ट पर जिन 8 पुलिसकर्मियों पर हत्या और अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, वे हैं:
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पुलिस उपाधीक्षक जुल्फिकार अली
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थानाधिकारी गोपाललाल जांगिड़
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हेड कांस्टेबल दिनेश गुर्जर
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कांस्टेबल प्रमोद लाठर, सुनील मेघवाल, भरत सिंह
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ग्रामीण रामनिवास लादी गुर्जर (चिरानी)
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रमेश गराटी गुर्जर (रामकुमारपुरा)
27 घंटे बाद इन मांगों पर बनी सहमति
लगातार प्रदर्शन के बाद प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच समझौता हुआ और धरना समाप्त हुआ। तय हुए प्रमुख बिंदु:
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पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड से करवाया जाएगा।
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जांच सीआईडी (सीबी) के एडिशनल एसपी करेंगे।
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सभी आरोपी पुलिसकर्मियों पर नामजद हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा।
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मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी संविदा नौकरी मिलेगी।
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एससी/एसटी एक्ट के तहत 8.25 लाख मुआवजा मिलेगा (4.12 लाख पोस्टमार्टम के बाद, बाकी चार्जशीट के बाद)।
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राज्य सरकार से अलग से 5 लाख मुआवजा भी दिया जाएगा।
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मृतक की पत्नी को हर महीने ₹7,000 पेंशन मिलेगी।
निष्कर्ष
यह मामला पुलिस हिरासत में हुई मौत का गंभीर उदाहरण है, जिसमें जनता के दबाव और धरने के चलते प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। अब जांच सीआईडी द्वारा की जाएगी और परिजनों को मुआवजा व नौकरी दी जाएगी।
