
झरनों में नहाने का आनंद, लेकिन खतरे भी साथ
भुवादरा में झरनों और ठंडे पानी में नहाने का मज़ा लेने दूर-दराज़ से लोग अपने परिवार के साथ आ रहे हैं। पहले लोग सीढ़ियों से छोटे झरनों तक पहुंचते थे, लेकिन अब पास में बने एनीकट के कारण नदी गहरी हो गई है। लोग अब एनीकट के नीचे बहते पानी और फिसलन भरे पत्थरों पर मस्ती कर रहे हैं।
यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 200 फीट नीचे फिसलन भरे और पथरीले रास्ते से गुजरना पड़ता है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है।
पर्यटन से बढ़ा रोजगार, लेकिन सुरक्षा गायब
भले ही पर्यटकों की भीड़ से स्थानीय दुकानदारों की कमाई बढ़ गई हो, लेकिन सुरक्षा इंतज़ाम बिल्कुल नहीं हैं। न तो प्राथमिक उपचार, न गाइड, और न ही स्थाई व्यवस्था।
फिर भी यहां पर पार्किंग के नाम पर 20 रुपए चारपहिया और 10 रुपए दोपहिया वाहनों से शुल्क लिया जा रहा है। बताया गया कि यह पैसा भुवादरा महादेव मंदिर निर्माण के नाम पर वसूला जा रहा है।
पर्यटकों की मांग: साफ-सफाई और सुरक्षा हो
स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मांग है कि प्रशासन यहां सुरक्षा, साफ-सफाई, ठंडा पानी और रास्ते की सुविधा उपलब्ध कराए, ताकि यह स्थल सुरक्षित और बेहतर पर्यटन केंद्र बन सके।
49.98 लाख खर्च, लेकिन हाल बेहाल
भुवादरा स्थल के विकास के लिए पहले 49.98 लाख रुपए खर्च कर फव्वारे, गार्डन, व्यू प्वाइंट और नदी तक सीढ़ियां बनाई गई थीं। लेकिन देखरेख के अभाव में ये सभी सुविधाएं अब खराब हालत में हैं।
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गार्डन में कचरे के ढेर हैं
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फव्वारे बंद पड़े हैं
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प्याऊ से गर्म पानी निकल रहा है
पर्यटकों को पीने के लिए ठंडा पानी खरीदना पड़ रहा है।
निष्कर्ष: भुवादरा का सौंदर्य तो लुभावना है, लेकिन यहां सुरक्षा और सुविधाओं की सख्त ज़रूरत है। प्रशासन को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
