
राजस्थान में बजरी (रेत) का अवैध खनन जोरों पर है। माफिया अब इसे बचाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। डंपरों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई जा रही हैं या फिर नंबरों पर कालिख पोत दी जाती है। कई बार तो डंपरों पर नंबर प्लेट लगाई ही नहीं जाती, जिससे उनकी पहचान न हो सके।
कई जिलों में चल रहा है ये खेल
यह खेल राजस्थान के टोंक, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर, बाड़मेर, नागौर और पाली जिलों में चल रहा है। पुलिस, आरटीओ और परिवहन विभाग की चेक पोस्टों के बावजूद डंपर आराम से निकल रहे हैं। इससे इन विभागों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कार्रवाई से बचने के लिए नंबर नहीं लगाते
माफिया जानबूझकर डंपरों पर नंबर प्लेट नहीं लगाते। इससे अगर कभी डंपर पकड़ा जाए या कोई दुर्घटना हो, तो वाहन की पहचान न हो पाए और बीमा क्लेम से भी बचा जा सके।
टोल टैक्स में भी गड़बड़ी
डंपरों की नंबर प्लेट न होने के कारण टोल प्लाजा पर कैमरे टैक्स नहीं काट पाते। ऐसे में माफिया टोल कर्मचारियों की मिलीभगत से किसी और गाड़ी का नंबर बताकर टैक्स कटवा लेते हैं। इसका नतीजा यह है कि कुछ ऐसे वाहनों का भी टोल कट रहा है जो महीनों से कहीं खड़े हैं।
छह महीने से खड़ा ट्रक, फिर भी कट रहा टैक्स
जयपुर-अजमेर रोड पर वाहन संख्या RJ 47 GB 5656 पिछले छह महीने से खड़ा है, लेकिन निवाई टोल प्लाजा से रोज इस नंबर पर टैक्स कट रहा है। जांच में सामने आया कि माफिया इस नंबर का इस्तेमाल फर्जी तरीके से टोल कटवाने में कर रहे हैं।
माफिया अपना रहे कई तरीके
बजरी माफिया कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी नंबर, कालिख पोती प्लेट और बिना नंबर प्लेट जैसे कई तरीके अपना रहे हैं। ऑल राजस्थान बजरी ट्रक ऑपरेटर्स वेलफेयर सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष नवीन शर्मा ने बताया कि सरकार को कई बार अवैध खनन रोकने के सुझाव दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
निष्कर्ष:
यह पूरा मामला दिखाता है कि किस तरह से बजरी माफिया सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर अवैध खनन कर रहे हैं और पुलिस, आरटीओ जैसे विभागों की मिलीभगत से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।
