
🗣️ क्या बोले मंत्री किरोड़ीलाल मीना?
मंत्री ने कहा कि:
“जो लोग अब साधन-सम्पन्न हैं, उन्हें प्रोत्साहन राशि देने का कोई मतलब नहीं है। इससे जरूरतमंदों का हक मारा जा रहा है। सरकारी मदद केवल उन लोगों को मिलनी चाहिए, जिन्हें वाकई जरूरत है – जिनके पास न पक्का मकान है, न बिजली-पानी, न जमीन।”
हालांकि, मंत्री की इस बात को बैठक की आधिकारिक रिकॉर्डिंग में शामिल नहीं किया गया।
🏡 क्या है गरीबी मुक्त गांव योजना?
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इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों को बेहतर आजीविका और आत्मनिर्भरता के लिए सरकार मदद देती है।
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योजना के पहले चरण में 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
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अप्रैल से जून 2025 तक 41 जिलों के 5002 गांवों में सर्वे किया गया।
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कुल 30631 परिवारों का सर्वे हुआ, जिसमें 22076 परिवार अब BPL की श्रेणी से बाहर निकल चुके पाए गए।
💸 क्या मिलेगा लाभ?
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जो परिवार BPL से बाहर हो चुके हैं, उन्हें भी सरकार प्रोत्साहन राशि 21,000 रुपए और “आत्मनिर्भर परिवार कार्ड” दे रही है।
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इसके लिए सरकार को कुल 46.35 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
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कई परिवारों को यह राशि मिल भी चुकी है।
❓ अब सवाल यह है…
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जब ये परिवार अब BPL सूची में नहीं आते, तो क्या केंद्र सरकार की योजनाओं (जैसे खाद्य सुरक्षा योजना) का लाभ इन्हें मिलता रहेगा?
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क्योंकि BPL सूची केंद्र सरकार द्वारा तय की जाती है, न कि राज्य सरकार द्वारा।
📊 चौंकाने वाले सर्वे आंकड़े
सर्वे में यह भी सामने आया कि:
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6524 परिवार अब भी गरीबी रेखा के नीचे हैं।
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इनमें से 122 परिवारों के पास बिजली, पानी, खाना तक नहीं है।
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1580 के पास जमीन का पट्टा, 1277 के पास घर, 1056 के पास शौचालय, 758 के पास इलाज के लिए पैसे, और 726 परिवारों के पास गैस कनेक्शन नहीं है।
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728 परिवारों को पेंशन भी नहीं मिल रही।
🔄 दूसरा चरण भी जारी
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दूसरे चरण में 5000 गांवों के 77545 परिवारों का सर्वे किया जाएगा।
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यह काम दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाएगा।
👉 कुल मिलाकर, योजना की मंशा भले अच्छी हो, लेकिन मंत्री के सवालों ने यह साफ किया है कि लाभ देने से पहले सही पात्रता की जांच बेहद जरूरी है।
