
जगतपुरा सहित जयपुर के कई इलाकों में होटल और रेस्टोरेंट के किचन बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कर्मचारियों और संचालकों का कहना है कि बिना गैस के खाना बनाना मुश्किल हो गया है, इसलिए कामकाज प्रभावित हो रहा है।
गैस की कमी के मुख्य कारण
कॉमर्शियल गैस की कमी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं।
पहला कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष से वैश्विक ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का काफी हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए इसका असर यहां भी देखा जा रहा है।
दूसरा कारण सरकार की प्राथमिकता है। सरकार ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरों में गैस की कमी न हो। इसके चलते कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई कुछ समय के लिए कम कर दी गई है।
तीसरा कारण जमाखोरी और कालाबाजारी भी माना जा रहा है। कई जगह सिलेंडर जमा करके ऊंचे दाम पर बेचने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे सामान्य होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को गैस नहीं मिल पा रही।
सरकार का पक्ष
राजस्थान सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की है। सरकार ने साफ कहा है कि घरेलू गैस की सप्लाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अगले 3 से 5 दिनों में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है।
आम लोगों पर असर
जयपुर में करीब 7,000 होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं। कुछ जगहों पर खाना बनाने के लिए इंडक्शन या कोयले का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन बड़े स्तर पर खाना बनाना इन तरीकों से मुश्किल है।
जगतपुरा के एक होटल कर्मचारी अजय का कहना है कि गैस का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। अभी तक जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा था, लेकिन अगर जल्द सप्लाई नहीं हुई तो ऑनलाइन ऑर्डर लेना बंद करना पड़ेगा।
वहीं होटल संचालक रविकांत शर्मा का कहना है कि गैस सिलेंडर की सप्लाई में देरी से कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द व्यवस्था ठीक करने की मांग की है।
