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राजस्थान में गैस सिलेंडर संकट: स्कूल, होटल और मैस प्रभावित

राजस्थान में इन दिनों गैस सिलेंडर की भारी कमी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पाने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि सरकारी स्कूलों, रेस्टोरेंट और हॉस्टलों की रसोई भी प्रभावित होने लगी है

टोंक में स्कूलों की रसोई पर संकट

टोंक जिले में एक गैस एजेंसी ने सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील (पोषाहार) के लिए मिलने वाले कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बंद कर दी है। इससे हजारों बच्चों के भोजन पर असर पड़ने की आशंका है। प्रशासन अन्य एजेंसियों से व्यवस्था करने की कोशिश कर रहा है।

जयपुर और अलवर में हंगामा

अलवर में एक गैस एजेंसी पर उस समय हंगामा हो गया जब ग्राहकों को सिलेंडर देने से मना कर दिया गया। लोगों ने एजेंसी पर कालाबाजारी के आरोप लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एजेंसी मालिक को खुद को ऑफिस में बंद करना पड़ा।

जयपुर में भी कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। कई जगह 2500 रुपये तक सिलेंडर बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

कोटा और सीकर में भी परेशानी

कोटा में गैस की कमी के कारण कई हॉस्टल और मैस बंद हो गए हैं। इससे छात्रों को खाने की समस्या हो रही है।

वहीं सीकर के कुछ गांवों में चार दिन से सिलेंडर की सप्लाई नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार ने उठाया कदम

स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया है। इसके तहत गैस सप्लाई को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर प्राथमिकता तय की गई है।

  • घरेलू गैस और CNG को पूरी सप्लाई

  • खाद कारखानों को लगभग 70% सप्लाई

  • बड़े उद्योगों को लगभग 80% सप्लाई

  • होटल और छोटे उद्योगों को सीमित सप्लाई

संकट की वजह क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या सप्लाई में कमी और कुछ जगहों पर कालाबाजारी के कारण बढ़ी है। कुछ सप्लायर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए गैस की कृत्रिम कमी भी पैदा कर रहे हैं।

आम लोगों पर असर

इस संकट का असर आम जनता पर भी पड़ रहा है।

  • होटलों में खाने की कीमतें बढ़ सकती हैं

  • सिलेंडर की कालाबाजारी से लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है

  • स्कूलों में मिड-डे मील प्रभावित होने से बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर असर पड़ सकता है

अगर सरकार के नए नियमों का सख्ती से पालन किया गया, तो घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों के लिए मुश्किलें अभी बनी रह सकती हैं।

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