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राजस्थान में छोटे जिलों का शानदार प्रदर्शन, बड़े शहर पीछे रह गए

राजस्थान में सुशासन को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, छोटे जिलों ने शिकायतों के निस्तारण में जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े जिलों को पीछे छोड़ दिया है। सीमित संसाधनों के बावजूद छोटे जिले ज्यादा तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर रहे हैं।

सवाई माधोपुर सबसे आगे

23 मार्च से 31 दिसंबर 2025 तक दर्ज शिकायतों के आंकड़ों के विश्लेषण में सवाई माधोपुर जिला पहले स्थान पर रहा

  • कुल शिकायतें: 88,605

  • निस्तारित शिकायतें: 84,363

  • निस्तारण दर: 95.21%

इसके अलावा:

  • भरतपुर: 95.16%

  • अलवर: 94.87%

  • टोंक और भीलवाड़ा: 94.9% से अधिक

इन जिलों में कड़ी निगरानी और त्वरित फैसलों के कारण बेहतर परिणाम देखने को मिले।

बड़े जिले क्यों रह गए पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिक आबादी और भारी कार्यभार के कारण बड़े जिलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

  • जयपुर: निस्तारण दर 93.56%, लेकिन अभी भी 18,536 शिकायतें लंबित

  • जोधपुर: 93.91%

  • कोटा और सीकर: करीब 94%

हालांकि संख्या के हिसाब से जयपुर में सबसे ज्यादा शिकायतें निपटाई गईं, लेकिन प्रतिशत के मामले में वह पीछे रहा।

मुख्य सचिव का बयान

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजस्थान संपर्क पोर्टल को देश के लिए एक मॉडल बताया। उन्होंने कहा:

  • शिकायत निपटान का औसत समय: 14 दिन

  • नागरिक संतुष्टि स्तर: 63%

  • हर महीने औसतन 2.5 से 3 लाख शिकायतों का निस्तारण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वयं इस प्रणाली की निगरानी करते हैं।

अब बड़े शहरों पर रहेगा फोकस

प्रशासनिक सुधार विभाग अब बड़े शहरी जिलों पर विशेष ध्यान देगा। आगे की योजना में शामिल हैं:

  • शिकायतों की पहचान के लिए AI तकनीक

  • अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण

  • शिकायतों की जड़ तक पहुंचने के लिए स्मार्ट डैशबोर्ड

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी जिले की कार्यक्षमता केवल शिकायतों की संख्या से नहीं, बल्कि निस्तारण प्रतिशत से आंकी जानी चाहिए। छोटे जिलों में सख्त निगरानी और जल्दी फैसले लेने की वजह से बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट बताती है कि सही प्रबंधन और मजबूत निगरानी से छोटे जिले भी बड़े जिलों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं

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