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राजस्थान में जल्द शुरू होगी ‘सहकारी कैब’, ओला-उबर की मनमानी पर लगेगा ब्रेक

जयपुर। राजस्थान में जल्द ही ‘को-ऑपरेटिव टैक्सी सर्विस’ (सहकारी कैब सेवा) शुरू होने जा रही है। यह सेवा खासतौर पर गांवों और दूर-दराज के इलाकों के लोगों के लिए होगी, जहां आज भी परिवहन की सुविधा बेहद सीमित है। इस योजना से ओला, उबर और रेपिडो जैसी प्राइवेट टैक्सी सेवाओं की मनमानी पर रोक लगेगी और लोग सस्ते किराए पर सफर कर सकेंगे।

ग्रामीण इलाकों को मिलेगा फायदा

🚖 गांवों में परिवहन की सुविधा अभी भी बहुत कमजोर है।
🚖 हजारों गांवों में स्कूल और अस्पताल जाने के लिए कोई वाहन नहीं है।
🚖 सहकारी समितियों के माध्यम से नई टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी।
🚖 राजस्थान में 37,642 सहकारी समितियां हैं, जिनमें 1.26 करोड़ से अधिक सदस्य हैं।

किन जिलों में है सबसे ज्यादा जरूरत?

राजस्थान के कई जिलों में सार्वजनिक परिवहन के साधन बहुत कम हैं। कुछ जिलों में प्रति 1000 लोगों पर वाहन उपलब्धता इस प्रकार है:
📍 प्रतापगढ़ – 143 वाहन
📍 करौली – 131 वाहन
📍 बाड़मेर – 126 वाहन
📍 उदयपुर – 328 वाहन
📍 जयपुर – 516 वाहन (सबसे ज्यादा)

कैसे खत्म होगी ओला-उबर की मनमानी?

✅ सहकारी कैब सेवा शुरू होने से गांवों में भी सस्ती टैक्सी, बाइक और रिक्शा सेवा उपलब्ध होगी
लोग अपनी बाइक या कार रजिस्टर कर रोजगार भी पा सकेंगे
✅ निजी टैक्सी कंपनियों की मनमानी खत्म होगी और किराया नियंत्रण में रहेगा।

कैसे होती है कंपनियों की कमाई?

📌 ओला – ₹200 की राइड में ड्राइवर को ₹140, कंपनी को ₹60 मिलते हैं।
📌 उबर – ₹200 की राइड में ड्राइवर को ₹130, कंपनी को ₹70 मिलते हैं।
📌 रेपिडो – ₹100 की राइड में ड्राइवर को ₹90-95 मिलते हैं।

दूसरे देशों में भी है ऐसी व्यवस्था

🌍 सिंगापुर और थाईलैंड जैसे देशों में सहकारी टैक्सी सेवाएं पहले से चल रही हैं।
🌍 इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों से ठगी और अधिक किराए की समस्या खत्म होगी।

निष्कर्ष

राजस्थान सरकार की ‘सहकारी कैब सेवा’ गांवों और शहरों के बीच परिवहन व्यवस्था को सुधारने में बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे न सिर्फ आम लोगों को सस्ती यात्रा मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा

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