
हर साल लाखों युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग
इस योजना के तहत हर साल करीब 3 लाख युवाओं को स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग दी जाएगी। इसके लिए कॉलेजों में डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक मशीनों वाली लैब बनाई जाएंगी, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ मशीनों पर काम करना भी सीख सकें।
बड़े संस्थानों का मिलेगा सहयोग
इस योजना को सफल बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली, टेक्सटाइल कमिश्नर, केंद्रीय रेशम बोर्ड, जूट आयुक्त और कई बड़े उद्योग संगठनों सहित करीब 27 संस्थानों की मदद ली जाएगी।
महिलाओं को मिलेगा खास मौका
पिछली योजना में करीब 88 प्रतिशत महिलाएं शामिल हुई थीं, इसलिए इस बार भी महिलाओं और पिछड़े जिलों के युवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
परंपरागत कारीगरों को मिलेगा तकनीक का साथ
राजस्थान के पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प कारीगरों को भी इस योजना के तहत नई तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचा सकें।
तकनीक से होगी निगरानी
योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आईरिस आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति और एआई आधारित निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा।
क्यों शुरू की गई योजना
भारत का लक्ष्य 2030 तक टेक्सटाइल निर्यात को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इसके लिए बड़ी संख्या में कुशल कामगारों की जरूरत होगी। समर्थ 2.0 योजना इसी जरूरत को पूरा करने के लिए शुरू की गई है।
योजना का बजट और लाभार्थी
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2026-27: 406 करोड़ रुपये, 2 लाख लाभार्थी
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2027-28: 574 करोड़ रुपये, 3 लाख लाभार्थी
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2028-29: 642 करोड़ रुपये, 3.5 लाख लाभार्थी
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2029-30: 634 करोड़ रुपये, 3.5 लाख लाभार्थी
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2030-31: 544 करोड़ रुपये, 3 लाख लाभार्थी
इस तरह कुल मिलाकर 5 वर्षों में 2940 करोड़ रुपये खर्च कर 15 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे टेक्सटाइल सेक्टर को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
