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किसान समर्थन मूल्य केंद्र पर क्यों नहीं आ रहे?
➡️ खुले बाजार में गेहूं की कीमत ज्यादा है। किसानों को MSP पर 2575 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहे हैं, जबकि बाजार में गेहूं 3000-4000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है।
➡️ MSP पर गेहूं बेचने से किसानों को 1000-1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान होगा, इसलिए वे समर्थन मूल्य केंद्र पर नहीं जा रहे।
MSP केंद्र पर गेहूं की खरीद नहीं, लेकिन उत्पादन बढ़ा
📌 पिछले छह वर्षों में नागौर जिले में गेहूं की खेती का रकबा 50,000 हेक्टेयर से कम नहीं हुआ।
📌 वर्ष 2024 में गेहूं की खेती 61,628 हेक्टेयर में हुई, लेकिन फिर भी कोई किसान MSP केंद्र पर गेहूं बेचने नहीं आया।
📌 किसानों का कहना है कि सरकार गेहूं खरीदने के लिए गंभीर नहीं है और MSP दर बहुत कम रखी गई है।
किसानों की राय: घाटे में गेहूं क्यों बेचें?
👨🌾 किसान सुरेश: “हम दिन-रात मेहनत करते हैं और हमें अपने श्रम का सही दाम चाहिए। जब बाजार में ज्यादा पैसा मिल रहा है, तो कम दाम पर क्यों बेचें?”
👨🌾 किसान सहदेव: “बाजार में गेहूं 4000 रुपए प्रति क्विंटल में तुरंत बिक रहा है, जबकि MSP पर बेचने से हमें भारी नुकसान होगा। MSP दर तय करने वाले लोग किसानों की समस्याएं नहीं समझते।”
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
📢 पवन कुमार खटनावालिया, किस्म निरीक्षक, भारतीय खाद्य निगम, नागौर:
“यह पहली बार है जब नागौर में गेहूं का MSP केंद्र खोला गया है। अभी फसल कटाई का समय चल रहा है, और बाजार में भाव ज्यादा होने के कारण किसान नहीं आ रहे हैं। हम उन्हें केंद्र तक लाने की कोशिश कर रहे हैं।”
निष्कर्ष:
➡️ किसान समर्थन मूल्य से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि बाजार में उन्हें कई गुना ज्यादा कीमत मिल रही है।
➡️ सरकार को MSP दर पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने को तैयार हों।
