
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि दो से अधिक संतान वाले लोगों पर रोक उस समय लगाई गई थी, जब जनसंख्या तेजी से बढ़ रही थी। 1991 से 1994 के बीच राज्य में प्रजनन दर 3.6 थी, जो अब घटकर करीब 2 रह गई है। यानी अब जनसंख्या वृद्धि पहले जितनी चिंता का विषय नहीं है।
इसी कारण सरकार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 19 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट ने दी मंजूरी
राज्य कैबिनेट ने पंचायतीराज संशोधन बिल और नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि दोनों विधेयक मौजूदा विधानसभा सत्र में ही पास कराए जाएंगे। इसके बाद दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों पर चुनाव लड़ने की रोक खत्म हो जाएगी।
इस फैसले से उन लोगों को राहत मिलेगी, जो अब तक इस नियम के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे।
पहले भी उठती रही है मांग
समय-समय पर इस नियम को हटाने की मांग उठती रही है। कई विधायकों ने सवाल किया था कि जब विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ऐसी कोई शर्त नहीं है, तो पंचायत चुनाव में ही यह रोक क्यों है? सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में भी यह शर्त पहले ही हटाई जा चुकी है।
जनप्रतिनिधियों का कहना था कि सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
31 साल पहले क्यों लगी थी रोक?
1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कानून में संशोधन कर दो से अधिक बच्चों वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई थी। इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था।
इस नियम के लागू होने के बाद कई निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता भी खत्म हुई थी। 1997 में हाईकोर्ट ने भी इस नियम को सही ठहराया था।
अब करीब 30 साल बाद इस नियम में बदलाव से पंचायत और निकाय राजनीति में बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
