
सरकार का कहना है कि इन एक्सप्रेस-वे को बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
1. जयपुर से पचपदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे
यह एक्सप्रेस-वे जयपुर रिंग रोड से शुरू होकर पचपदरा के पास अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा।
-
लंबाई: 350 किमी
-
लागत: करीब 11 हजार करोड़ रुपये
-
जुड़े जिले: जयपुर, अजमेर, पाली और जोधपुर
अभी इस रूट से 390 किमी दूरी तय करने में 6-7 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह दूरी लगभग 3.5 घंटे में तय की जा सकेगी।
2. जालोर से झालावाड़ एक्सप्रेस-वे
यह मार्ग जालोर से शुरू होकर झालावाड़ में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा।
-
लंबाई: 402 किमी
-
लागत: 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक
अभी हाईवे से 578 किमी की दूरी तय करने में करीब 10 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह समय लगभग 4 घंटे रह जाएगा। इससे हाड़ौती, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ पश्चिमी राजस्थान का संपर्क मजबूत होगा।
3. सोलर हब को राजधानी से जोड़ने वाला एक्सप्रेस-वे
यह एक्सप्रेस-वे उत्तरी जयपुर रिंग रोड से शुरू होकर फलोदी में एनएच-11 से जुड़ेगा।
-
लंबाई: 345 किमी
-
लागत: करीब 11 हजार करोड़ रुपये
यह मार्ग जयपुर, कालवाड़, जोबनेर, नावां, कुचामन, डीडवाना और नागौर से होकर गुजरेगा। अभी इस रूट पर 410 किमी की दूरी तय करने में 7 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद यह समय 3.5 घंटे हो जाएगा।
औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
इन सभी एक्सप्रेस-वे को जामनगर-अमृतसर कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिससे गुजरात के पोर्ट तक की दूरी कम होगी। पश्चिमी राजस्थान में रिफाइनरी और जोधपुर-पाली के बीच प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलेगा। इससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं बेहतर होंगी।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से राजस्थान में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
