राजस्थान में HMPV का खतरा: बच्चों पर बढ़ा संकट, अलर्ट पर चिकित्सा विभाग
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राजस्थान में एचएमपीवी (ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस) के मामलों को देखते हुए चिकित्सा विभाग सतर्क हो गया है। डूंगरपुर और बारां जिलों में दो बच्चों में इस वायरस की पुष्टि हुई है। इसके बाद पूरे प्रदेश में स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
जेके लोन अस्पताल अलर्ट मोड पर
जयपुर के जेके लोन अस्पताल को एचएमपीवी से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है। अस्पताल में विशेष आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जिसमें 10 बिस्तर और वेंटिलेटर जैसी सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, वायरस से जुड़े मामलों के लिए डेडीकेटेड ओपीडी भी शुरू की गई है।
डॉक्टरों ने दी चेतावनी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. कैलाश मीणा ने बताया कि इस वायरस के लक्षण कोविड-19 जैसे हैं, जैसे खांसी, गले में घरघराहट, नाक बहना और गले में खराश। यह वायरस समय के साथ निमोनिया या ब्रोंकाइटिस का रूप ले सकता है। छोटे बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है, जिससे इसके तेजी से फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है।
बारां और डूंगरपुर में मामले
बारां जिला: छीपाबड़ौद क्षेत्र के भावपूरा गांव में 6 माह की बच्ची में वायरस की पुष्टि हुई है। मेडिकल टीम ने गांव में सर्वे किया है और अन्य बच्चों की जांच की जा रही है। फिलहाल, दूसरा मामला सामने नहीं आया है।
डूंगरपुर जिला: रीछा गांव में भी मेडिकल टीम ने सर्वे किया है।
स्वास्थ्य विभाग की सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि एचएमपीवी के बढ़ते मामलों के मद्देनजर बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी सावधानियां बरती जाएं। लोग अपने बच्चों में किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
लोगों को जागरूक करने की अपील
माता-पिता को सलाह दी जा रही है कि वे बच्चों की साफ-सफाई का ध्यान रखें, बीमार बच्चों से दूरी बनाए रखें, और किसी भी तरह की खांसी या बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।