
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इस लाइब्रेरी को आधुनिक ई-लाइब्रेरी बनाने की योजना थी, लेकिन अब नई सरकार इसे पूरा नहीं कर रही है।
8 करोड़ खर्च, फिर भी लाइब्रेरी बंद
गहलोत के अनुसार, करीब 7.96 करोड़ रुपये की लागत से लाइब्रेरी का नया भवन बनकर तैयार है। इसके बावजूद इसे अभी तक छात्रों के लिए नहीं खोला गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब बिल्डिंग तैयार है, तो फिर इसे चालू क्यों नहीं किया जा रहा?
छोटा काम बाकी, फिर भी देरी
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल फर्नीचर और कुछ अंतिम काम के लिए बजट नहीं दिया जा रहा है। गहलोत ने तंज करते हुए पूछा कि क्या सरकार को शिक्षा और ज्ञान से कोई परेशानी है?
विरासत पर राजनीति का आरोप
गहलोत ने कहा कि सुमेर लाइब्रेरी सिर्फ एक लाइब्रेरी नहीं, बल्कि जोधपुर की एक महत्वपूर्ण पहचान है। उनका दावा है कि सत्ता बदलने के बाद इस प्रोजेक्ट को जानबूझकर रोक दिया गया है।
छात्रों को हो रही परेशानी
उन्होंने कहा कि हजारों छात्र इस लाइब्रेरी के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। सुविधाएं नहीं होने के कारण उन्हें बाहर या कम संसाधनों वाले स्थानों पर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
सरकार से मांग
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की है कि तुरंत बजट जारी कर लाइब्रेरी को शुरू किया जाए, ताकि छात्रों का इंतजार खत्म हो सके।
सोशल मीडिया पर उठ रहा मुद्दा
‘इंतजारशास्त्र’ सीरीज के जरिए गहलोत लगातार ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर भी चर्चा बढ़ रही है और युवाओं के बीच यह विषय तेजी से फैल रहा है।
