
नीतियों की अस्पष्टता बनी रोड़ा
विकास की संभावनाएं तो हैं, लेकिन नियमों की सख्ती और नीतियों की कमी ने इन इलाकों को काफी पीछे छोड़ दिया है। खासकर पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता न होने से निवेश भी प्रभावित हो रहा है।
जैसलमेर: सिर्फ 14 आवेदन, सभी अटके
जैसलमेर में केवल 14 वाणिज्यिक जल कनेक्शन के आवेदन आए हैं, जिनमें से 5 आवेदन पर्यटन क्षेत्र “सम” से जुड़े हैं। यहां नीतियों की स्पष्टता नहीं होने के कारण कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया। एक आवेदन खारिज हो चुका है और बाकी अब भी लंबित हैं। जैसलमेर शहर में 9 आवेदन हुए हैं, जिन पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
बाड़मेर: 65% से ज्यादा आवेदन खारिज
बाड़मेर में 83 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 54 (यानी 65%) को खारिज कर दिया गया।
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22 को स्वीकृति मिली और
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7 आवेदन अभी लंबित हैं।
बाड़मेर शहरी क्षेत्र में 42 आवेदन हुए, जिनमें से 22 खारिज हुए। ग्रामीण क्षेत्रों जैसे चौहटन, गडरा रोड, शिव और गुड़ामलानी में भी खारिजी दर काफी ज्यादा रही।
बालोतरा: आधे से ज्यादा आवेदन लंबित या खारिज
यहां 71 आवेदन आए, जिनमें से 37 खारिज कर दिए गए और 20 अब भी पेंडिंग हैं।
बालोतरा सिटी में 38 आवेदन मिले, जिनमें से 19 खारिज हो गए।
सिणधरी में आए सभी 4 आवेदन खारिज कर दिए गए, जबकि समदड़ी और सिवाना में भी अधिकांश आवेदन अब तक मंजूरी नहीं पा सके हैं।
राज्य के अन्य जिलों में वाणिज्यिक जल कनेक्शन के आवेदन (संख्या में):
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जयपुर: 4423
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जोधपुर: 1284
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बीकानेर: 564
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अजमेर: 987
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डीडवाना-कुचामन: 137
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अलवर: 203
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भरतपुर: 127
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खेरथल-तिजारा: 208
निष्कर्ष:
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की व्यवस्था और स्पष्ट नीतियों की कमी के कारण औद्योगिक विकास की रफ्तार थमी हुई है। जब तक जल कनेक्शन देने की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी नहीं होगी, तब तक इन जिलों में निवेश और रोजगार के अवसर भी पीछे रहेंगे।
