
बसों की भारी कमी
2016 तक रोडवेज के पास 5700 बसें थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 2900 रह गई है। सरकार ने 500 नई बसें खरीदी हैं और 800 बसें किराए पर ली हैं, लेकिन यह भी जरूरत से कम है। पूरे प्रदेश में रोडवेज को सुचारू रूप से चलाने के लिए 3000 और बसों की जरूरत है, लेकिन सरकार ने सिर्फ 1300 बसों की व्यवस्था की है, जिनमें से 300 बसें इलेक्ट्रिक होंगी।
कब होती है बस कंडम घोषित?
नियमों के अनुसार 8 साल पुरानी या 9 लाख किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी बसों को कंडम माना जाता है। लेकिन फिर भी कई पुरानी बसें सड़क पर दौड़ रही हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी के मौसम में बैटरी, वायरिंग और गियर की समस्याएं बढ़ जाती हैं, जिससे बसें रास्ते में खराब हो जाती हैं। झालावाड़ में कई बार निजी वर्कशॉप में बसों को ठीक कराया जाता है।
रोडवेज कर्मचारियों की मांगें
📌 हर साल 1000 नई बसें खरीदी जाएं।
📌 संचालन घाटे की भरपाई के लिए 1200 करोड़ रुपए का बजट रखा जाए।
📌 रोडवेज को 6000 करोड़ रुपए का पैकेज दिया जाए।
राजस्थान में रोडवेज की जर्जर बसें (मॉडल अनुसार)
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2012 मॉडल – 141 बसें
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2014 मॉडल – 10 बसें
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2015 मॉडल – 17 बसें
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2016 मॉडल – 492 बसें
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2017 मॉडल – 263 बसें
झालावाड़ जिले में नकारा बसों की स्थिति
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2010 मॉडल – 1 बस
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2013 मॉडल – 13 बसें
रोडवेज की कुल स्थिति
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कुल खराब बसें – 863
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कुल बसें – 2900
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अनुबंधित बसें – 872
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झालावाड़ में कुल बसें – 51
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नई बसों की जरूरत – 30
👉 झालावाड़ रोडवेज डिपो के चीफ मैनेजर पवन सैनी ने बताया कि 13 बसें बहुत पुरानी हो चुकी हैं, और उनके प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। अनुमति मिलने के बाद इन्हें अजमेर की केंद्रीय वर्कशॉप भेजा जाएगा।
